Kohramlive : एक जमाना था जब कर्रेगुट्टा आतंक का अड्डा हुआ करता था, वहां नक्सलवाद की नब्ज धड़कती थी। बीजापुर और मुलुगु के बीच, 5 हजार फीट की ऊंचाई पर जहां कोई परिंदा भी पर नहीं मारता था, वहां आज तिरंगा सीना ताने लहरा रहा है। यह कर्रेगुट्टा की आजादी की हुंकार है। बीते 21 अप्रैल से शुरू ऑपरेशन कर्रेगुट्टा के तहत 24 हजार जवानों ने मौत की घाटियों को चुनौती दी। बस्तर फाइटर्स से लेकर कोबरा कमांडो तक, हर कदम नक्सल के किले की ईंट हिला रही थी। जहां एक समय हिडमा, सुजाता, दामोदर और देवा की हुकूमत थी, वहां अब गूंज रही है भारत माता की जय। हेलीकॉप्टरों की परछाई, ड्रोन की निगाहें और कोबरा की चाल हर मोर्चे पर दुश्मन की सांसें टटोल रही थीं। वजूद की लड़ाई में सिस्टम की जीत हुई और आतंक की हार का प्रतीक बन गया है। इस साल अब तक 144 नक्सली मारे गये। 300 सरेंडर कर गये। बीते साल 792 नक्सलियों ने हथियार डाले। बीते 29 मार्च को 18 नक्सली मारे गये। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि “31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त होगा।”
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