Dhanbad : धनबाद की घाटियों में जब एक ओर सगाई के गीत बज रहे थे, वहीं, लक्ष्मी अपने दिल की पुकार सुन रही थी। पिता ने रिश्ता कहीं और तय कर दिया था, लेकिन चूड़ियों की खनक, मेहंदी की महक और मंगल गीतों की गूंज के बीच लक्ष्मी ने वह कर दिया, जिसे गांव ने कभी देखा नहीं था। प्रेमी संग वह चुपचाप निकल पड़ी, बिना विदाई, बिना विदा… सीधा बिहार के गया शहर। पिता ने थाने की राह ली और पुलिस उन्हें ढूंढ़ लाई। गया से दोनों को टुंडी थाना लाया गया। पर गांव वालों की नजरें तलवार बनीं और घरवालों ने बेटी को अपनाने से इनकार कर दिया। खून के रिश्ते ठुकरा गये, लेकिन प्रेम ने उसका हाथथाम लिया। थाने में पंचायत बुलाई गई। स्थानीय मुखिया ने दोनों पक्षों को समझाया। और फिर जो हुआ, उसने उस प्रेम कथा को समाज के सामने मिसाल बना दिया। प्रेमी के परिवार ने लक्ष्मी को अपनी बहू बना लिया। उसी गांव के मंदिर में, जहां कभी दोनों ने एक दूजे को वचन दिया था, आज वह वचन सात फेरे बन गये।
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