Kohramlive : बिहार की राजनीति फिर से करवट लेने को बेताब है, वहीं लोकतंत्र के मंदिर यानी मतदान केंद्रों को और पाक-साफ बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। चुनाव आयोग ने अपनी कलम और कागज नहीं, अब टेक्नोलॉजी को अपना हथियार बना लिया है। आयोग जर्बदस्त और असरदार तीन बदलाव लाकर लोकतंत्र को मजबूत करेगा। मसलन, अब मृतकों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं रहेंगे। बिहार की गलियों में अक्सर बूढ़े बुजुर्ग चुटकी लेते हुये कहते थे, ”मर गये लेकिन वोटर लिस्ट में आज भी जिंदा हैं!” अब ऐसे किस्से इतिहास बनेंगे। पंजीयक जनरल ऑफ इंडिया से डायरेक्ट इलेक्ट्रॉनिक कनेक्शन होगा, जिससे मृत्यु के बाद नाम अपने-आप हट जायेगा। बीएलओ सिर्फ फील्ड में जाकर सत्यापन करेंगे, बिना किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किये। वहीं, वोटर स्लिप अब और भी अपनत्व भरी होगी। अब आपकी स्लिप बोलेगी, “मैं हूं तुम्हारा चुनाव साथी।” बड़ा फॉन्ट, साफ जानकारी, पार्ट नंबर और सीरियल नंबर एकदम नजरों के सामने, ताकि बूथ पर कोई उलझन न हो। मुफस्सिल से लेकर मेट्रो शहर तक हर वोटर को अब अपनी पहचान तक पहुंच आसान लगेगी। इसी तरह BLO को पहचान का हक मिलेगा। अब जब दरवाज़े पर दस्तक दे BLO तो कोई न कहे, “पहले अपना परिचय दो।” हर BLO को पहचान पत्र मिलेगा, एक ऐसा परिचय-पत्र जो उन्हें लोगों की नजरों में विश्वास दिलायेगा। धूप हो या बारिश, जब वो आयेंगे आपकी चौखट पर, तो भरोसे की एक चमक भी साथ लायेंगे।
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