जानिये अभिनेता Dilip Kumar के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें
Mumbai : बॉलीवुड ने एक और दिग्गज अभिनेता को खो दिया। हिन्दी सिनेमा के दिग्गज कलाकार Dilip Kumar (दिलीप कुमार) का आज निधन हो गया। बुधवार को Dilip Kumar ने 98 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बुधवार सुबह 7:30 बजे मुंबई के खार हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली।
अभिनेता दिलीप कुमार के बारे में कुछ दिलचस्प बातें। दरअसल अभिनेता Dilip Kumar का नाम मोहम्मद युसूफ खान था। उनका जन्म ब्रिटिश इंडिया के पेशावर स्थित क़िस्सा खावानी बाजार एरिया की हवेली में 11 दिसंबर को हुआ था। उनकी मां का नाम आयशा बेगम और पिता लाला गुलाम सरवर खान था।
Dilip Kumar के 12 भाई बहन थे। उन्होंने नासिक के देओली स्थित बार्नेस स्कूल से अपनी पढ़ाई की थी। सुपरस्टार राज कपूर उनके बचपन के दोस्त थे। दोनों एक ही मोहल्ले में एक साथ अपना बचपन बिताया था।
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1940 में Dilip Kumar का उनके पिता के साथ किसी बात को लेकर बहस हो गई और उन्होंने घर छोड़ दिया। पुणे में आकर एक सैंडविच स्टॉल खड़ा किया। उस वक्त उनकी मदद एक पारसी कैफे ऑनर ने की जो एक एंगलो इंडियन थे।

1943 में उनके पिता की आर्थिक स्थिति काफी डमाडोल हो गई। पिता की मदद के लिए Dilip Kumar काम ढूंढने लगे। काम ढूंढते-ढूंढते बॉम्बे टॉकीज पहुंचे। उर्दू में अच्छी पकड़ की वजह से शुरुआत में उन्होंने स्टोरी राइटिंग और स्क्रिप्टिंग का काम किया। बॉम्बे टॉकीज की मालकीन एक्ट्रेस देविका रानी ने दिलीप कुमार को उनका नाम मोहम्मद युसूफ खान से बदलकर दिलीप कुमार रखने को कहा।
देवकी ने उन्हें फिल्म ज्वार भाटा में कास्ट किया। हालांकि इस फिल्म को कुछ खास प्रसिद्धि नहीं मिली। कुछ फ्लॉप फिल्में करने के बाद दिलीप कुमार ने एक्ट्रेस नूरजहां संग फिल्म जुगनू में काम किया। यहां से उनके जीवन में बदलाव आया। यह उनकी पहली हिट फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने हिट फिल्मों की झड़ी लगा दी। शहीद, मेला जैसी हिट फिल्में दी। नरगिस और राज कपूर के साथ फिल्म शबनम में काम किया। इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर काफी धमाल मचाया। फिर शुरू हुआ दिलीप कुमार का दौर। 1950 में पर्दे पर छा गए दिलीप कुमार। एक के बाद एक कई हिट फिल्में दी।

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यह वो दौर था जब दिलीप कुमार ने बहुत सारे गंभीर रोल निभाए, जिसकी वजह से उन्हें बॉलीवुड के ट्रेजेडी किंग का नाम मिला। हालांकि गंभीर रोल निभाते-निभाते वे खुद डिप्रेशन में चले गए। मनोचिकित्सक की सलाह पर उन्होंने खुशमिजाज किरदारों को करना शुरू किया। मेहबूब खान की फिल्म आन में उन्होंने अपना पहला लाइट किरदार निभाया था। दर्शकों का उनका ये हंसता हुआ अंदाज भी भा गया।
1960 में दिलीप कुमार ने फिल्म मुगल-ए-आजम में शहजादे सलीम का किरदार निभाया था। यह बॉलीवुड के इतिहास की सबसे ज्यादा कमाई करने वाल फिल्म बनी और 11 साल तक टॉप पर बनी रही। 1961 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म गंगा जमुना को प्रोड्यूस किया था और बतौर प्रोड्यूसर यह उनकी इकलौती फिल्म थी। 1950 से पर्दे पर राज करने वाले दिलीप कुमार 1970 करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजरे।
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एक के बाद एक कई फिल्में फ्लॉप रही। जिसकी वजह से कई फिल्में राजेश खन्ना और संजीव कुमार को दे दी गई। नाकामी से परेशन दिलीप कुमार ने 5 साल तक ब्रेक लिया। 1981 में दिलीप कुमार ने फिल्म क्रांति से शानदार वापसी की। वह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट रही थी। 1991 में आई फिल्म सौदागर उनकी बॉक्स ऑफिस पर आखिरी सफल फिल्म थी। उन्हें आखिरी बार 1998 में आई फिल्म किला में देखा गया था, जो फ्लॉप हुई थी।

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दिलीप कुमार के नाम है सबसे ज्यादा अवॉर्ड्स जीतने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
दिलीप कुमार के नाम एक भारतीय एक्टर के रूप में सबसे ज्यादा अवॉर्ड्स जीतने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है। अपने पांच दशकों के करियर में दिलीप कुमार ने कई अवॉर्ड्स जीते थे। इसमें 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (बेस्ट एक्टर), एक फिल्मफेयर का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, नेशनल फिल्म अवॉर्ड, पद्मभूषण, पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और पाकिस्तान सरकार द्वारा दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशां-ए-पकिस्तान शामिल है।
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