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अनाथ हो गए चार भाई-बहन, डेड बॉडी भी मिली तो पैरवी से, बाप का हो गया खून, मां को निगल गया कोरोना…

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Ranchi (Rajesh/Sanjay) : पिता के साए से वंचित चार भाई-बहन तब अनाथ हो गए, जब कोरोना उनकी मां को निगल गया। अब इन भाई-बहनों का कोई नाथ नहीं है। इन्‍हें इस बात का एहसास उसी रोज हो गया था, जब मां की डेड बॉडी देने से साफ-साफ इनकार कर दिया। इनसे कहा गया था कि पहले अस्‍पताल का दो लाख 63 हजार 908 रुपये जमा करो, तभी मिलेगी मां की डेड बॉडी। यह फरमान था संत अन्‍ना अस्‍पताल का। यह अस्‍पताल नामकुम के राजा उलातू बस्‍ती में है। अनाथ और गरीब भाई-बहनों के पास फूटी कौड़ी नहीं थी। वे रोने-बिलखने लगे। उनकी चीख-चीत्‍कार पहुंची खिजरी के विधायक राजेश कच्‍छप के पास। फिर नामकुम जिला परिषद सदस्‍य आरती कुजूर के कानों तक पहुंची। इन दोनों की पहल का नतीजा यह रहा कि अस्‍पताल प्रबंधन बिल का 50 परसेंट माफ करने को राजी हो गया। पर अनाथ क्‍या करते, उनके पास तो एक रुपया नहीं था। किसी तरह नारी समिति से 54 हजार रुपये कर्ज लेकर अस्‍पताल में जमा किया तो डेड बॉडी मिली। अब कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। मां की डेड बॉडी तो बच्‍चों को जरूर मिल गई, पर डेथ सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। शर्त रखी गई है कि पहले बिल चुकता करो, फिर मिलेगा डेथ सर्टिफिकेट। वहीं अस्‍पताल प्रबंधन ने पूछे जाने पर फोन डिस्‍कनेक्‍ट कर दिया।

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नामकुम थाना क्षेत्र के तुंबा गुटु करमटोली गांव में रहनेवाले इन गरीब बच्‍चों के पिता भीठु टोप्‍पो की हत्‍या साल 2007 में कर दी गई थी। पिता के मारे जाने के बाद किसी तरह उनकी मां चारी टोप्‍पो मजदूरी कर अपने चार बच्‍चों को पाल-पोस रही थी। अचानक वह कोरोना पॉजिटिव हो गई। बीमार चारी टोप्‍पो को संत अन्‍ना अस्‍पताल राजा उलातू में भर्ती कराया गया, जहां 8 जून को वह मर गई। मां-बाप के मरने के बाद अनाथ बच्‍चों को यह चिंता सताए जा रही है कि अब उनका रखवाला कौन होगा। खाना-पीना, पढ़ाई-लिखाई और शादी-व्‍याह अब कैसे क्‍या होगा। गुजरे तीन-चार दिनों से आस-पड़ोस में रहने वाले लोग अपना निवाला उन्‍हें खिलाते रहे। घर में खाने का अन्‍न तक नहीं था। पास तनी मनी जमीन है। खेतीबाड़ी करने का लुर अभी सीखा नहीं। देखि‍ए… क्‍या बोल गये- अनीमा, अमृता, अरुणा और उनका भाई मोहन।

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