Ranchi (Rupam/Pawan Thakur) : पूरे गांव मुहल्ले को यह पता था कि आज अरुण का तिलक है और 7 को बारात जाना है। अरुण के पूरे परिवार में खुशियां छाई थी। पूरे घर को सजाया-धजाया गया था। सारे रिश्ते-नातेदारों का जुटना शुरू हो गया था। संयुक्त परिवार के सबसे छोटे बेटे अरुण की शादी की पूरी तैयारी कर ली गई थी। लगभग 32 साल का अरुण इस रिश्ते को लेकर खुश भी था। वह होनी वाली अपनी नई नवेली दुल्हन फूल से रोज बातें भी करता था। सपने भी संजोता था कि… कैसा होगा अपना घर। कल भी फूल ने अरुण को फोन किया। तब अरुण ने उससे कहा… डॉक्टर के पास जा रहे हैं, बाद में फोन करते हैं। कुछ इधर-उधर की बातें भी हुई थी। तय समय पर अरुण घर नहीं लौटा। बड़े भाई राम रंजन साहू, ज्ञान रंजन साहू और सतीश कुमार का दिल घबराने लगा। अरुण का मोबाइल जब स्विच ऑफ बताने लगा तो सब के सब बेचैन हो गये।
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रात 10 बजे तीनों भाई और पड़ोस के कुछ लोग रातू थाना गये। पुलिस को सबकुछ बताया। अरुण का अंतिम लोकेशन देर शाम साढे सात बजे कीता रेलवे स्टेशन मिला। यह स्टेशन रांची के करीब सिल्ली के पास है। सब के सब भाई अरुण के मोबाइल नंबर 7870634375 पर लगातार फोन करते रहे। हर बार फोन स्विच ऑफ मिला। किसी अनहोनी की शंका ने पूरे परिवार को घेर लिया। बड़ा भाई राम रंजन साहू का मन नहीं माना। वह रात में ही कार से निकल पड़े सिल्ली। उनके साथ छोटा भाई ज्ञान, दोस्त नीरज सुमन, दिलीप साहू और देवेंद्र साहू भी थे। देर रात ढाई बजे के करीब सिल्ली थाना पहुंचे। थाना गेट में तैनात चौकीदार ने सबको सावधान कर पूछा… कौन है? दोस्त बोल कर इंट्री मिली। चौकीदार ने रात्री ड्यूटी कर रहे अफसर को जगाया। अफसर को सारी बात बताई गयी। अफसर ने कहा… रात 11 बजे की रिपोर्ट है… सिल्ली रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात युवक की लाश मिली है। सबके सब बेचैन हो गये, तुरंत निकलने के लिए। अफसर ने रोका… उन्हें बताया गया इलाका ठीक नहीं है। भोर में चला जायेगा। इस बीच बड़ा भाई अरुण के बारे में उसके कुछ दोस्तों से पूछते रहे। कुछ दोस्तों ने बताया कि अरुण आज डेरा नहीं आया था। वह 23 जुलाई तक छुट्टी लेकर गया है। उसकी शादी होने वाली है। अब हनीमून मनाने के बाद ही ड्यूटी ज्वाइन करेगा।
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सिल्ली रेलवे स्टेशन में लाइनमैन की हैसियत से कार्यरत अरुण की शादी की कार्ड भी छप चुकी थी। दोस्त महीम तक न्यौता पहुंच चुका। भोर के पांच बजे राम रंजन भाई और दोस्तों के साथ सिल्ली रेलवे ट्रैक पर पहुंचे। ट्रैक के बीचो-बीच एक डेड बॉडी पर नजर पड़ी। पोशाक देखते ही बड़ा भाई माथा पकड़ कर बैठ गया। ये वही पोशाक था जो अरुण ने घर से निकलते समय पहन रखा था। मैरून टी शर्ट, ब्लू जींस, वुडलैंड का ब्राउन कलर का जूता। पास में ही उसकी पैशन प्रो JH01DL-9238 बाइक भी पड़ी थी। धड़ से सिर अलग था। सिर चूर-चूर हो चुका था। सिर्फ लोथड़े बचे हुए थे। पूरे बदन पर चोट ही चोट। बिना पलक झपकाये पूरे बदन को कई बार निहार गये। खुली आंखों ने रड और चाकू के दना-दन वार को समझ सका। बड़े भाई ने मौके पर ही पुलिस के सामने दावा किया… यह मर्डर है। सुसाइड या कोई और हादसा नहीं। आज सिल्ली आने का कोई मतलब भी नहीं था। भाई दावा कर गया… टूटे हुए दोनों हाथ, पेट, पीठ, जांघ और पैर में अनगिनत गहरे जख्मों के मिले निशान यही गवाही दे रहे हैं। अरुण कल दिन के चार बजे घर से निकला था। उसे कचहरी रोड में अपनी दांत साफ करानी थी। मौका-ए-वारदात से भाईयों ने जब फोन कर परिवार के बाकी सदस्यों को यह मनहूस खबर सुनाई तो आंगन में कोहराम मच गया। मां का रो-रो कर बुरा हाल है। गांव में मातम छा गया। वहीं कांके के संग्रामपुर का एक घर भी सूना-सूना हो गया। यह घर था होने वाली दुल्हन फूल का। देखा सुनी के बाद 12 जून को फूल का और 24 जून को अरुण का छेका हुआ था। अरुण को 2013 में रेलवे में नौकरी लगी थी। 6 साल पाकुड़ में रहे। बीते एक साल से सिल्ली में पोस्टिंग थी। भाभी, मामा और पड़ोसी की बातें सुन आपको रोना आ जायेगा…
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