बेटा बंधुआ मजदूर, बाप पर 1 करोड़ का ईनाम…

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Kohramlive : देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में ऐलान किया कि मार्च 2026 के बाद देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो जायेगा। लेकिन झारखंड के घने जंगलों में अब भी एक नाम सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाये हुये है मिसिर बेसरा। लगभग 67 साल के मिसिर बेसरा जिसे कभी माओवादी संगठन का सबसे खतरनाक रणनीतिकार कहा जाता था। वहीं, इसके सिर पर एक करोड़ रुपये का ईनाम है। इसके नाम से कभी सारंडा से लेकर झारखंड-बंगाल की सीमा तक दहशत पसरी रहती थी।

बेसरा बनाम असीम मंडल

ईनामी मोस्ट वांटेड मिसिर बेसरा की खोज निकालने के ऑपरेशन में जुटे एक आला पुलिस अधिकारी ने बताया कि लगातार आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों में बड़े नेताओं के मारे जाने के बाद अब माओवादी संगठन भीतर से कमजोर पड़ चुका है। जनवरी 2026 में शीर्ष माओवादी नेता अनल दा के मारे जाने के बाद अब संगठन में दो बड़े नाम मिसिर बेसरा और असीम मंडल उर्फ आकाश और कार्तिक बचे हैं। दोनों पर एक-एक करोड़ रुपये का ईनाम है। इस आला पुलिस अधिकारी का दावा है कि संगठन के भीतर अब दोनों गुटों के बीच प्रभाव और नेतृत्व को लेकर टकराव की स्थिति बन चुकी है।

पढ़ाई छोड़ हथियारों की राह पर निकल पड़ा था बेसरा

मिसिर बेसरा का जन्म झारखंड के गिरिडीह के मदनाडीह गांव में हुआ था। गांव से शुरुआती पढ़ाई के बाद वह धनबाद पहुंचा, जहां राजनीति विज्ञान की पढ़ाई के दौरान वह वामपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित हो गया। उस दौर में झारखंड आंदोलन और सामाजिक उथल-पुथल का माहौल था। धीरे-धीरे वह माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर से जुड़ गया और फिर हथियारों के रास्ते पर निकल पड़ा। 1980 के दशक में उसने घर छोड़ दिया। पीछे रह गई पत्नी, छोटा बेटा और एक बिखरता परिवार। उसके बेटे सिद्धार्थ ने कभी पुलिस को बताया था कि “जब मैं छोटा था, पिता दो-तीन बार घर आये थे, फिर कभी नहीं लौटे।” कहते हैं कि मोस्ट वांटेड मिसिर बेसरा का बेटा सिद्धार्थ बंधुआ मजदूर है।

बिटकिलसोय और बलिबा हमलों से बढ़ा था कद

झारखंड अलग राज्य बनने के बाद शुरुआती वर्षों में बेसरा ने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया। 2003 और 2004 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में हुये IED हमलों में 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुये थे। इन्हीं घटनाओं के बाद संगठन में मिसिर बेसरा का कद तेजी से बढ़ा और उसे पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो की जिम्मेदारी मिली।

कोर्ट परिसर से फिल्मी अंदाज में फरार

साल 2009 के जून महीने में बिहार के लखीसराय की अदालत परिसर से मिसिर बेसरा फरार हो गया था। पुलिस बेसरा को पेशी के बाद बाहर ला रही थी। तभी मोटरसाइकिलों पर सवार करीब 30 हथियारबंद माओवादी अचानक पहुंचे। बम फेंके गये, गोलियां चलीं, अफरा-तफरी मच गई। बम-बारूद के धुयें और गोलियों के बीच मिसिर बेसरा पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। उस घटना में एक पुलिसकर्मी की मौत हुई थी और कई जवान घायल हुये थे।

अब जंगलों में सिमट गया है माओवादी नेटवर्क

पुलिस का कहना है कि अब झारखंड में माओवादी नेटवर्क लगभग टूट चुका है। सारंडा के जंगलों में लगातार ऑपरेशन चलाये जा रहे हैं। जनवरी में हुये बड़े अभियान में CCM नेता अनल दा समेत 15 माओवादी मारे गये थे। इस अभियान में CRPF, Jharkhand Jaguar और कोबरा बटालियन के जवान शामिल थे। पुलिस का दावा है कि अब 25 से भी कम सक्रिय माओवादी बचे हैं। पुलिस का कहना है कि मोस्ट वांटेड मिसिर बेसरा और असीम मंडल सारंडा क्षेत्र छोड़ दिया है, लेकिन अब ज्यादा समय तक वे बच नहीं पायेंगे।

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