गायत्री परिवार के महिला मंडल ने महिलाओं को बताया पालन-पोषण संस्कार का महत्व
GARHWA (NITAYANAND DUBEY): गायत्री परिवार महिला मंडल की ओर से ‘आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी’ कार्यक्रम के तहत सोमवार को चिरौंजिया आंगनबाड़ी केंद्र में गर्भवती महिलाओं को पुंसवन यानी पालन-पोषण संस्कार का महत्व बताया। मौके पर महिला मंडल की जिला प्रभारी शोभा पाठक ने संस्कारवान संतान की प्राप्ति के लिए संस्कार परंपरा को अपनाने की बात कही। कहा कि हमारे ऋषियों ने अच्छे मानव गढ़ने के सूत्र दिए हैं, लेकिन आज हम उस सूत्र पर अमल नहीं करते हैं। हमारे शास्त्रों में 24 प्रकार के विभिन्न संस्कार बताए गए हैं। इसकी शुरूआत पुंसवन संस्कार से होती है, जब शिशु अपनी मां की गोद में होता है। जैसे ही शिशु तीन महीने की आयु पाता है, उसका मस्तिष्क का विकास शुरू हो जाता है। मां के खान-पान, चिंतन का पूरा प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मौके पर बीटीटी रंजू मिश्रा, आंगनबाड़ी सेविका विनिता देवी, महिला मंडल की ममता तिवारी सहित कई लोग उपस्थित थे।
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