Delhi : दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस वक्त कोर्ट में सन्नाटा था, लेकिन बाहर एक लहर थी—न्याय की लहर, जिसे पाने में 40 साल लगे। अदालत के कटघरे में खड़े पूर्व सांसद सज्जन कुमार के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, मगर इतिहास की गवाही देने वाले पन्ने बोल रहे थे। 1984 के सिख विरोधी दंगों में पिता-पुत्र की हत्या के मामले में दोषी ठहराये गये सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुना दी गई। नानावटी आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 2,733 निर्दोष लोग मौत के आगोश में समा गये। 587 एफआईआर दर्ज हुईं, मगर इंसाफ का सफर लंबा और तकलीफों से भरा रहा। सैकड़ों केस बंद कर दिये गये, कुछ आरोपी बरी हो गये, लेकिन 400 को दोषी ठहराया गया। सज्जन कुमार, जिनके कंधों पर सत्ता का हाथ था, अब कानून के शिकंजे में हैं।
इधर, सिख नेता गुरलाद सिंह ने कहा कि “हम अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। हम चाहते हैं कि सज्जन कुमार को मौत की सजा मिले।” दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद, जिन्होंने इन 35 साल से दबे मामलों को फिर से खुलवाया। अब जगदीश टाइटलर और कमल नाथ को भी न्याय के कटघरे में खड़ा होना होगा।” वहीं, एडवोकेट एच.एस. फूल्का ने कहा, “सज्जन कुमार की उम्र 80 साल है, वह बीमार हैं। कानून कहता है कि इतने बुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति को फांसी की सजा नहीं दी जा सकती। मगर यह दो उम्रकैद भी कम नहीं।”
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