कोहराम लाइव डेस्क : अब यह जानकार कोई हैरत में पड़े बिना कैसे रह सकता है कि इंडिया में एक ऐसी जगह भी है, जहांं हमेशा जवान और खूबसूरत रहा जा सकता है। मानव को हमेशा जवान और खूबसूरत रखने पर विज्ञान भी दशकों से प्रयास में लगा हुआ है, पर कामयाबी अब तक नहीं मिली है। मिल जाए, तो क्या कहना। कोई बूढ़ा क्यों होगा। बुढ़ापे की समस्या ही हल हो जाएगी। फिर भी यह बात तो कुदरत के नियमों के खिलाफ ही है। हां, कुदरत ने ही अगर हमारे ही देश में कोई ऐसी जगह बनाई है कि वहां हम अपनी जवानी और खूबसूरती हमेशा के लिए कायम रख सकते हैं, तो इसके राज से रूबरू होने की हसरत हर किसी में होगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं, हरियाणा में अरावली पर्वत श्रृंखला के पास मौजूद धोसी पहाड़ी की।
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कायाकल्प औषधि बरकरार रखती है जवानी
जानकार बताते हैं कि इस पहाड़ी से आयुर्वेद के कई प्रकार के रहस्य जुड़े हुए हैं। यहां कायाकल्प औषधि पाई जाती है। हमेशा जवान और खूबसूरत बनाए रखने वाली औषधि का नाम ही कायाकल्प है। इस औषधि के प्रयोग से त्वचा तो अच्छी होती ही है और सेहत भी लगातार बेहतर होता जाता है।
एक सुप्त ज्वालामुखी है धोसी पहाड़ी
धोसी पहाड़ी वास्तव में अरावली पर्वत श्रृंखला के अंतिम छोर पर उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक सुप्त ज्वालामुखी है। यह उत्तरी अक्षांश 28*03’39.47″ और पूर्वी देशांतर 76*01’52.63″ पर बसी एकमात्र पहाड़ी है। इसकी चर्चा हमारे कई धार्मिक ग्रंथों में भी मिलती है।
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दक्षिण हरियाणा एवं उत्तरी राजस्थान की सरहदों पर स्थित
धोसी पहाड़ी दक्षिण हरियाणा एवं उत्तरी राजस्थान की सरहदों पर स्थित है। पहाड़ी का हरियाणा वाला भाग महेंद्रगढ़ जिले में पड़ता है। राजस्थान वाला भाग झुंझनू जिले में स्थित है। कहा जाता है कि यह ऐसी चमत्कारी पहाड़ी है। इसका रहस्य आज भी बना हुआ है कि आखिर इसमें ऐसा क्या है जो महान वेदों, महान व्यक्तियों, ऋषियों के महान गुणों अपने भीतर धारण कर लेती है। यह पहाड़ी ज्वालामुखी है, तो इसमें कोई विस्फोट कभी क्यों नहीं हुआ है।
पांडवों का अज्ञातवास यहां भी हुआ था
ऐसा कहा जाता है कि पांडव भी अपने अज्ञातवास के दौरान यहां आए थे। विश्व के सनातन धर्म के प्रारंभिक विकास से लेकर आयुर्वेद की महत्वपूर्ण खोज च्यवनप्राश का रिश्ता भी इस पहाड़ी से रहा है।
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ज्वालामुखीय संरचना मानने से भूगर्भशास्त्रियों का इनकार
एक सुप्त ज्वालामुखी की संरचना होते हुए भी भूगर्भशास्त्री इसे ज्वालामुखी जैसी संरचना मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि पिछले 20 लाख सालों में अरावली पर्वत श्रृंखला में कोई ज्वालामुखी विस्फोट नहीं हुआ, इसलिए इसे ज्वालामुखी संरचना मानना सही नहीं है।












