Dhanbad : घो-घो रानी, इतना पानी..स्कूली बच्चों की जुबां पर यह बोल और क्लास रूम में कागज के नाव का तैराने को खूब मजा कहें या सजा, यह तो पब्लिक जानें। झमाझम बारिश के बरसते ही सिस्टम पर तीखी चोटें लगती है। यहीं हाल कुछ अस्पतालों का भी है। कई स्कूल तो ऐसे हैं, जिनके छतों से टपकता पानी इस बात का गवाह है कि कभी भी अनहोनी को न्योता मिल सकता है। ढलईया छतों में अंदर से लोहे के रड का झांकना और बाहर की दिवार पर प्लास्टर नहीं होना, दरार और फांका वेंटिलेटर यह बयां कर जाती है कि यह अपने धनबाद शहर का स्कूल और हॉस्पिटल है। ऐसा भी नहीं है कि सबके सब गड़बड़ है। करीब 1726 सरकारी स्कूलों में से 91 की हालत पतली होती जा रही है।

अजब गजब सीन बारिश में खुली आंखों से ही दिखाई पड़ने लगता है। इनसे बचने का कोई इंतजाम नहीं। स्कूल बिल्डिंग की हालत पर बोलने का मतलब आफत। नाम और रूतबा सबसे बड़ा अस्पताल होने का। पर जरूरत है केवल एक बार एसएनएमएमसीएच में झांक लेने की। कई वार्ड, आईसीयू, एचडीयू, मेडिसिन वार्ड में लबालब पानी ही पानी। मानो मरीजों और उनके अटेंड को दे दी गई हो काले पानी की सजा।

बारिश का सबसे ज्यादा मजा दे जाती है यहां की सड़कें। कहां गड्डा ढिपा, कुछ पता ही नहीं चलता। गड्डा ढिपा नापना हो तो बस जरूरत है एक दफा स्टील गेट, हीरापुर, गया पुल से लेकर कई पुर की तरफ मुड़ जाने की।

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