बच्चा खुद बैठ जायेगा पढ़ाई करने, बस अपनायें ये 5 स्मार्ट तरीके…

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Kohramlive : “पढ़ाई कर लो”, “होमवर्क पूरा किया?”, “कितनी बार कहना पड़ेगा?”—अगर ये बातें आपके घर में रोज सुनाई देती हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। अधिकांश माता-पिता इस परेशानी से गुजरते हैं कि उनका बच्चा बिना याद दिलाये पढ़ाई के लिये तैयार नहीं होता। नतीजा यह होता है कि घर का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है और माता-पिता व बच्चों के बीच अनावश्यक खींचतान बढ़ने लगती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को डांटकर या दबाव बनाकर पढ़ाई के लिये मजबूर करना लंबे समय में फायदेमंद नहीं होता। इसके बजाय कुछ सरल और सकारात्मक तरीके अपनाकर बच्चों में पढ़ाई के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित की जा सकती है।

पढ़ाई को बोझ नहीं, दिनचर्या का हिस्सा बनायें

बच्चे अक्सर पढ़ाई को एक जिम्मेदारी या दबाव के रूप में देखने लगते हैं। इससे बचने के लिये जरूरी है कि पढ़ाई को उनकी रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बनाया जाये। हर दिन एक निश्चित समय तय करें, जब बच्चा नियमित रूप से पढ़ाई करे। कुछ दिनों बाद यह उसकी आदत बन जायेगी और उसे बार-बार याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नियमित रूटीन बच्चों में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है।

बड़े काम को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटें

कई बार पूरा सिलेबस या ढेर सारा होमवर्क देखकर बच्चे घबरा जाते हैं। ऐसे में उन्हें छोटे-छोटे लक्ष्य दें। उदाहरण के लिये, पहले एक अध्याय पूरा करने या कुछ सवाल हल करने का लक्ष्य निर्धारित करें। जब बच्चा एक लक्ष्य पूरा कर ले, तो उसकी सराहना करें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और पढ़ाई के प्रति उसका नजरिया सकारात्मक होता है।

बच्चे की रुचि को समझें

हर बच्चे की पसंद और क्षमता अलग होती है। किसी को गणित पसंद होता है तो किसी को चित्रकला, संगीत या विज्ञान। माता-पिता को चाहिये कि वे बच्चे की रुचियों को समझें और पढ़ाई को उससे जोड़ने की कोशिश करें। जब सीखना बच्चे को रोचक लगने लगता है, तो वह खुद आगे बढ़कर पढ़ाई करने लगता है।

तुलना करने की आदत छोड़ें

अक्सर माता-पिता अपने बच्चे की तुलना भाई-बहनों, दोस्तों या रिश्तेदारों के बच्चों से करने लगते हैं। यह आदत बच्चे के आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचा सकती है। हर बच्चे की सीखने की क्षमता और गति अलग होती है। इसलिए तुलना करने के बजाय बच्चे की व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान दें और उसे आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करें।

केवल नंबर नहीं, मेहनत की भी सराहना करें

कई अभिभावक केवल अच्छे अंक आने पर ही बच्चों की तारीफ करते हैं। जबकि बच्चों की मेहनत, नियमितता और सीखने की कोशिशों की भी सराहना की जानी चाहिये। जब बच्चे को यह महसूस होता है कि उसकी कोशिशों की भी कद्र हो रही है, तो वह और बेहतर करने के लिए प्रेरित होता है।

सकारात्मक माहौल से बढ़ती है सीखने की इच्छा

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में पढ़ाई की आदत विकसित करने का सबसे प्रभावी तरीका सकारात्मक और सहयोगी माहौल बनाना है। डांट-फटकार और दबाव की जगह प्रोत्साहन, समझदारी और धैर्य का इस्तेमाल किया जाये तो बच्चे न केवल पढ़ाई में रुचि लेने लगते हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से समझने लगते हैं।

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