Kohramlive : अगर आपने कभी अमेरिकी फिल्मों या विदेशी कारों को गौर से देखा हो, तो एक बात जरूर नोट की होगी। भारत में जहां कार का स्टीयरिंग दाईं ओर होता है, वहीं अमेरिका में यह बाईं ओर होता है। यह अंतर सिर्फ डिजाइन का नहीं, बल्कि सदियों पुराने सड़क नियमों और इतिहास से जुड़ा हुआ है। भारत और अमेरिका में स्टीयरिंग की अलग-अलग स्थिति कोई तकनीकी संयोग नहीं, बल्कि सड़क यातायात नियमों और ऐतिहासिक परंपराओं का परिणाम है। जहां भारत ब्रिटिश विरासत के कारण बाईं ओर वाहन चलाता है, वहीं अमेरिका ने दाईं ओर चलने की व्यवस्था अपनाई। इसी वजह से भारत में स्टीयरिंग दाईं ओर और अमेरिका में बाईं ओर होता है।
सड़क के नियम तय करते हैं स्टीयरिंग की जगह
किसी भी देश में स्टीयरिंग व्हील की स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि वहां वाहन सड़क के किस तरफ चलते हैं। भारत में वाहन सड़क की बाईं ओर चलते हैं, इसलिये ड्राइवर दाईं ओर बैठता है। अमेरिका में वाहन सड़क की दाईं ओर चलते हैं, इसलिये ड्राइवर बाईं ओर बैठता है। इस व्यवस्था का मकसद ड्राइवर को सड़क के बीच वाले हिस्से और सामने से आने वाले ट्रैफिक का बेहतर दृश्य देना है। इससे ओवरटेकिंग और ड्राइविंग दोनों अधिक सुरक्षित हो जाती हैं। भारत, United Kingdom, Australia और Japan जैसे देशों में वाहन सड़क के बाईं ओर चलते हैं। ऐसे में ड्राइवर दाईं ओर बैठकर सामने की स्थिति को बेहतर ढंग से देख सकता है।
इसकी जड़ें घुड़सवारों के दौर में
इस परंपरा की शुरुआत मोटर कारों से बहुत पहले हो चुकी थी। पुराने समय में अधिकांश लोग दाहिने हाथ से तलवार चलाते थे और तलवार को बाईं कमर पर रखते थे। सड़क के बाईं ओर चलने से उनका दाहिना हाथ खुला रहता था, जिससे किसी खतरे या हमले की स्थिति में वे तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते थे। यही परंपरा बाद में ब्रिटेन में सड़क नियमों का हिस्सा बनी और फिर ब्रिटिश शासन के दौरान भारत समेत कई उपनिवेशों में लागू हुई।
आजादी के बाद भी भारत ने क्यों नहीं बदला नियम?
1947 में आजादी मिलने के बाद भारत ने सड़क यातायात की पूरी व्यवस्था बदलने के बजाय मौजूदा प्रणाली को ही जारी रखा। करोड़ों वाहनों, सड़कों और यातायात ढांचे को बदलना बेहद महंगा और जटिल काम होता, इसलिये भारत ने बाईं ओर चलने की व्यवस्था बनाये रखी।
अमेरिका ने अलग रास्ता क्यों चुना?
United States ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के बाद अपनी सड़क व्यवस्था विकसित की और दाईं ओर चलने का नियम अपनाया। इसके साथ ही वहां वाहनों का स्टीयरिंग बाईं ओर रखा जाने लगा। बाद में France, Germany और कई अन्य देशों ने भी यही व्यवस्था अपनाई।
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