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15 मिनट में पार होगा वह रास्ता जो कभी छह महीने तक बंद रहता था…

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Kohramlive : हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच एक ऐसा सपना आकार ले रहा है, जिसका इंतजार कश्मीर और लद्दाख की कई पीढ़ियां करती रही हैं। बर्फ, तूफान और हिमस्खलन से जूझते जोजिला दर्रे के नीचे बन रही विशाल सुरंग अब अपने सबसे अहम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। उम्मीद है कि 9 जून तक इसके निर्माण का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो जायेगा। यह सुरंग उन लाखों लोगों की उम्मीद है जो हर सर्दी में दुनिया से कट जाने की मजबूरी झेलते रहे हैं। यह परियोजना कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क का नया अध्याय लिखने जा रही है।

11,600 फीट की ऊंचाई पर बन रहा इंजीनियरिंग का चमत्कार

करीब 13.15 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग जम्मू-कश्मीर के बालटाल को लद्दाख के मीनामर्ग से जोड़ेगी। इसके पूरा होने पर यह देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग और एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक सड़क सुरंगों में शामिल होगी। करीब 6808 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना केवल सुरंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक अप्रोच रोड और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

जहां छह महीने बंद रहता था रास्ता

दशकों से जोजिला दर्रा कश्मीर और लद्दाख के बीच जीवनरेखा रहा है। लेकिन हर साल भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग पांच से छह महीने तक बंद हो जाता था। सड़क बंद होते ही लद्दाख का बड़ा हिस्सा देश के बाकी हिस्सों से लगभग कट जाता था। दवाइयों, खाद्यान्न, ईंधन और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होती थी। मरीजों, छात्रों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब सुरंग के चालू होने के बाद यही सफर कुछ घंटों की बजाय महज 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। कारगिल के लोगों के लिये यह परियोजना किसी सपने के सच होने जैसी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जोजिला सुरंग सर्दियों के अलगाव को हमेशा के लिये खत्म कर देगी। कारगिल के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह परियोजना सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए दरवाजे खोलेगी। अब मरीजों को इलाज के लिये महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा और छात्रों की पढ़ाई भी मौसम की मार से प्रभावित नहीं होगी।

पर्यटन को मिलेगा रफ्तार का नया इंजन

कश्मीर की वादियों से लेकर द्रास, कारगिल और लेह की खूबसूरत पहाड़ियों तक पहुंच अब पहले से कहीं आसान हो जायेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जोजिला सुरंग और पहले से शुरू हो चुकी जेड-मोड़ सुरंग मिलकर पर्यटन उद्योग में नई जान फूंकेंगी। होटल व्यवसाय, ट्रांसपोर्ट, रेस्तरां और स्थानीय कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। जोजिला सुरंग का महत्व भारत की सामरिक ताकत को भी नई मजबूती देने वाली है। श्रीनगर-कारगिल-लेह मार्ग सेना की रसद आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं तक सैनिकों, हथियारों और जरूरी सामग्री की निर्बाध आवाजाही के लिये यह सुरंग बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। सर्दियों में भी सेना की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेगी।

माइनस 45 डिग्री में भी नहीं रुका काम

इस परियोजना का निर्माण आसान नहीं रहा। इंजीनियरों को बर्फीले तूफानों, हिमस्खलनों, जल रिसाव और बेहद कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कई बार तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पिछले वर्ष हिमस्खलन के कारण हजारों श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा था। इसके बावजूद अत्याधुनिक तकनीकों और नवीन ऑस्ट्रियन टनलिंग पद्धति की मदद से काम लगातार जारी रहा। हालांकि सुरंग की खुदाई का अंतिम चरण पूरा होने जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी कई महत्वपूर्ण काम बाकी रहेंगे। सड़क निर्माण, वेंटिलेशन सिस्टम, विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा उपकरण, जल निकासी नेटवर्क और अंतिम लाइनिंग जैसे कार्य पूरे होने के बाद ही सुरंग यातायात के लिये खोली जायेगी। सरकार ने फिलहाल फरवरी 2028 तक परियोजना को पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा है।

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