Kohramlive : सोचिये, कोई इंसान 5300 साल पहले मर चुका हो, उसका शरीर बर्फ में दफन होकर ममी बन गया हो, लेकिन उसके भीतर मौजूद सूक्ष्म जीव आज भी एक्टिव हों। सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों की नई खोज ने इसे हकीकत साबित कर दिया है। यूरोप की सबसे चर्चित ममी “ओत्जी द आइसमैन” को लेकर हुये ताजा अध्ययन ने वैज्ञानिक जगत में सनसनी फैला दी है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इस ममी के शरीर में मौजूद कुछ प्राचीन बैक्टीरिया और यीस्ट न केवल जीवित हैं, बल्कि हजारों साल बाद भी अपने वातावरण के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं।
कौन था ओत्जी द आइसमैन?
ओत्जी द आइसमैन वह प्रागैतिहासिक व्यक्ति है जिसकी ममी 1991 में इटली और ऑस्ट्रिया की सीमा पर आल्प्स पर्वत की बर्फ में मिली थी। वैज्ञानिकों के अनुसार उसकी मौत करीब 5300 वर्ष पहले एक तीर लगने से हुई थी। ताम्र युग के इस शिकारी का शरीर बर्फ में सुरक्षित रह गया, जिससे मानव इतिहास के कई रहस्यों पर से पर्दा उठा।
ममी के भीतर मिला प्राचीन सूक्ष्मजीवों का संसार
इटली के यूरैक रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ओत्जी की त्वचा, आंतरिक ऊतकों और उसके संरक्षण कक्ष में मौजूद पिघले बर्फीले पानी के नमूनों का अध्ययन किया। शोध के दौरान वैज्ञानिकों को ममी के भीतर एक ऐसा सूक्ष्मजीवीय संसार मिला, जो हजारों वर्षों से छिपा हुआ था। अध्ययन में पता चला कि ओत्जी की आंतों में मौजूद कई बैक्टीरिया आज भी चयापचय यानी मेटाबॉलिक गतिविधियां कर रहे हैं। वैज्ञानिकों को सक्रिय बैक्टीरिया के विश्लेषण से यह भी पता चला कि ओत्जी ने मौत से पहले क्या खाया था। उसके भोजन में अधिक वसा वाला जंगली मांस, प्राचीन अनाज और एक विषैला फर्न पौधा शामिल था। आश्चर्य की बात यह है कि आंतों में मिले बैक्टीरिया उसी भोजन से पूरी तरह मेल खाते हैं।
आधुनिक दुनिया से गायब हो चुके बैक्टीरिया मिले
शोधकर्ताओं ने रोम्बौत्सिया होमिनिस और क्लोस्ट्रिडियम मोनिलिफॉर्म जैसे दुर्लभ बैक्टीरिया की पहचान की है। ये बैक्टीरिया आधुनिक शहरी आबादी में लगभग समाप्त हो चुके हैं। हालांकि आज भी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की कुछ दूरदराज जनजातियों में इनके निशान मिलते हैं। इस खोज को मानव स्वास्थ्य और विकास के इतिहास को समझने की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
कीटाणुनाशक को ही भोजन बना रहे यीस्ट
अध्ययन का सबसे चौंकाने वाला पहलू यीस्ट से जुड़ा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि ममी की सुरक्षा के लिये इस्तेमाल किये जाने वाले फिनोल आधारित कीटाणुनाशकों को कुछ सूक्ष्म यीस्ट अब भोजन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले नौ वर्षों में इन यीस्ट की संख्या और गतिविधियां बढ़ी हैं। यानी ये सूक्ष्मजीव आधुनिक रसायनों के अनुरूप खुद को ढालने में सफल हो रहे हैं। यह खोज केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा तक सीमित नहीं है। इससे दुनिया भर के संग्रहालयों और संरक्षण विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ गई है। अगर हजारों साल पुराने सूक्ष्मजीव अत्यधिक ठंड में जीवित रह सकते हैं और आधुनिक रसायनों को भी पचा सकते हैं, तो वे धीरे-धीरे ऐतिहासिक धरोहरों को अंदर से नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञ अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी जैविक गतिविधियों को कैसे नियंत्रित किया जाये।
5300 साल पुराना रहस्य अभी भी बरकरार
हालांकि वैज्ञानिक ओत्जी के शरीर से जुड़े कई रहस्यों का खुलासा कर चुके हैं, लेकिन उसकी हत्या किसने की थी और क्यों की थी, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। मगर उसके शरीर में जीवित मिले सूक्ष्मजीव अब मानव इतिहास, स्वास्थ्य, बीमारियों और प्राचीन जीवनशैली को समझने का नया रास्ता खोल रहे हैं। ओत्जी द आइसमैन की ममी यह साबित करती है कि प्रकृति अपने भीतर कितने अनगिनत रहस्य समेटे हुये है। 5300 साल पहले खत्म हुई एक जिंदगी आज भी वैज्ञानिकों को नई जानकारियां दे रही है। बर्फ में सोया यह प्रागैतिहासिक शिकारी भले ही हजारों साल पहले दुनिया छोड़ चुका हो, लेकिन उसके भीतर मौजूद सूक्ष्म जीव आज भी विज्ञान को चौंकाने का काम कर रहे हैं।




इसे भी पढ़ें : बाल हो रहे हैं तेजी से पतले, ये 5 जुगाड़ फिर से भर देंगे जान, जानें…
इसे भी पढ़ें : 15 मिनट में पार होगा वह रास्ता जो कभी छह महीने तक बंद रहता था…
इसे भी पढ़ें : बन रहा मौसम का नया खेल, ‘कोल्ड ब्लब’ ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता…
इसे भी पढ़ें : सुबह की ये 5 आदतें बदल सकती हैं आपका पूरा दिन…
इसे भी पढ़ें : बच्चा खुद बैठ जायेगा पढ़ाई करने, बस अपनायें ये 5 स्मार्ट तरीके…






