अब यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल व ओडिशा के लोगों को सोचना होगा और झारखंड सरकार का करना होगा विरोध
RANCHI : शोषित इंकलाब पार्टी के महासचिव शैलेश कुमार गिरि ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि हेमंत सरकार द्वारा स्थानीयता के मामले में 1932 के खतियान को आधार बनाने के फैसले को न राज्य हित में और न देश हित में सही कहा जा सकता। बताया कि बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लोग फैसले का झारखंड में विरोध करने पर मजबूर होंगे। झारखंड के मुख्यमंत्री को 1932 और 1985 की बात से अलग 2000 की बात करनी चाहिए, जब झारखंड अलग हुआ।
झारखंड में लागू था 1985 का खतियान
गिरि ने कहा कि बिहार के दक्षिणी हिस्से को खंडित कर 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग कर झारखंड राज्य अपने वजूद में आया। झारखंड में स्थानीयता का आधार 1985 का खतियान था। इसे बीजेपी के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लागू किया था, जो लागू था। यूं कहें तो वो भी न्यायसंगत नहीं था। 1932 के खतियान को आधार बनाना बिल्कुल गलत है। बिहार से झारखंड 15 नवंबर 2000 को अलग हुआ और उस समय तक सब कुछ एक ही था तो ये खतियान कभी भी 2000 के आस-पास ही होना चाहिए।
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