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नरकोपी थाना में बवाल, जनाक्रोश उबाल पर… देखें वीडियो

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Kohramlive :  संदेही गुनहगार सहरुद्दीन अंसारी की मौत की फैली खबर के बाद जनाक्रोश उबाल पर आ गया। गुस्साये लोगों ने रविवार को नरकोपी थाना का घेराव कर खूब नारेबाजी की। थाना गेट को तोड़ने का भी प्रयास किया गया। आक्रोशित लोग सहरुद्दीन अंसारी की मौत के लिए नरकोपी थाना के कुछ पुलिस अधिकारियों जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हे  दंडित करने की मांग पर अड़े थे। इन पुलिस अधिकारियों पर मर्डर केस दर्ज कर उन्हे बर्खास्त करने की डिमांड कर रहे थे। नरकोपी थाना घेराव किए जाने की खबर पर मौके पर कई छोटे बड़े पुलिस अधिकारी पहुंच गए। कई थानों की पुलिस को भी बुला लिया गया। पुलिस अधिकारियों द्वारा उनकी मांग पर कार्रवाई करने का भरोसा देने के बाद घेराव हटा लिया गया। लोगों का कहना था कि बिना जांच पड़ताल किए ही बीते 27 अगस्त को सहरुद्दीन अंसारी को गिरफ्तार किया गया। थाने में उसे थर्ड डिग्री दी गयी। बेरहमी से उसे पीटा गया। उसपर एक नाबालिग के साथ बदसलूकी का इल्जाम लगा था।

सहरुद्दीन की बेवा शबाना खातून ने रांची पुलिस कप्तान के नाम प्रेषित आवेदन में इस बात का जिक्र किया है कि गिरफ़्तारी के बाद जब घरवाले सहरुद्दीन से मिलने नरकोपी थाना गये तो उन्हे मिलने नहीं दिया गया। उल्टे उन्हे धमकी देकर भगा दिया गया। बीते 9 सितंबर की शाम नरकोपी थाना से फोन कर उसे बताया गया कि उसका पति बीमार है, रिम्स जाकर मिल लो। 10 सितम्बर को वह रिम्स गई, पर वहां भी उसे अपने पति से मिलने नहीं दिया गया। उसी रात 9 बजे के करीब उन्हें जानकारी मिली कि उसके पति की मौत हो गई। 11 सितम्बर को उनके ससुर, देवर और घरवाले रिम्स गये तो देखा कि उसके पति के बदन के कई हिस्सों में गहरे घाव के निशान हैं। यह घाव पुलिस सितम की गवाही दे रहे थे। शबाना खातून का इल्जाम है कि उसके पति को पुलिस पदाधिकारी अविनाश हेम्ब्रम, सुनील मुर्मू, बीरेंद्र मुंडा, सुनील कच्छप एवं थाना के वाहन चालक दिनेश उरांव द्वारा बेरहमी से पीटा गया। इन सभी पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग की गई है। वहीं घटना के बाद नरकोपी के सेरो गांव आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी, पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर एवं सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कानून सम्मत कार्रवाई करने की मांग की गई है। इनपर माहौल खराब करने का इल्जाम लगाया गया है। इधर, झारखंड आंदोलनकारी झामुमो नेता आजम अहमद ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि नरकोपी के सेरो गांव में रहनेवाले सहरूद्दीन अंसारी की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। उसका इलाज भी हुआ था। गांव में छेड़छाड़ की घटना के बाद गांव के कुछ लोगों द्वारा उसे पकड़ नरकोपी थाना के हवाले किया गया था। उसे थाना में बहुत मारा गया।

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