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रिम्स-2 निर्माण के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, मोरहाबादी में रोकी गई पदयात्रा…

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Ranchi : राजधानी रांची के नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 के विरोध में सैकड़ों ग्रामीण, किसान और आदिवासी समजा आज सड़क पर उतर आये। रांची के मोरहाबादी मैदान में जुटे लोग पदयात्रा निकालकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ पड़े। हाथों में तख्तियां, जुबां पर नारे और दिल में अपनी जमीन बचाने की चिंता लिये प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री आवास से पहले ही पुलिस की बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठ गये और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश करने लगे।

“अस्पताल चाहिए, लेकिन खेतों की कीमत पर नहीं”

नगड़ी और आसपास के गांवों से पहुंचे ग्रामीणों का कहना था कि जिस जमीन पर रिम्स-2 बनाने की योजना है, वह केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह भूमि अत्यंत उपजाऊ है और वर्षों से यहां खेती होती रही है। यदि इस कृषि भूमि पर अस्पताल परिसर का निर्माण किया गया तो किसानों की आजीविका पर सीधा संकट आ जायेगा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी प्रभावित होगा। ग्रामीणों का कहना था कि वे स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास का रास्ता किसानों की उपजाऊ जमीन से होकर नहीं गुजरना चाहिये।

“गुरुजी ने हमेशा खेती की जमीन बचाने की बात कही थी”

मौके पर मौजूद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि झारखंड आंदोलन के पुरोधा और स्वर्गीय शिबू सोरेन (गुरुजी) हमेशा कृषि योग्य भूमि की रक्षा के पक्षधर रहे। उन्होंने कहा कि गुरुजी का मानना था कि उपजाऊ खेतों को किसी भी परिस्थिति में सरकारी परियोजनाओं के लिये अधिग्रहित नहीं किया जाना चाहिये।  उन्होंने सरकार से किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुये रिम्स-2 के लिये वैकल्पिक भूमि तलाशने की मांग की। आंदोलनकारियों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण किसी मुआवजे की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी एकमात्र मांग यह है कि रिम्स-2 का निर्माण उपजाऊ कृषि भूमि पर न किया जाये। उन्होंने कहा कि राज्य में कई अन्य स्थान उपलब्ध हैं, जहां इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजना को स्थापित किया जा सकता है। सरकार को किसानों की जमीन बचाते हुये किसी वैकल्पिक स्थल पर निर्माण की योजना बनानी चाहिये।

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