Ranchi (Pawan Thakur/Sanjay Kapardar) : अगर ज़िंदगी खुदा की रहमत है तो जीना इस कदर दुश्वार क्यों? उसके पास सबकुछ था अगर नहीं था तो सिर्फ एक बच्चा। नतीजा उसे रोज-रोज ऐसे ताने दिये जाते थे, कि उसके लिए जीना मुश्किल हो गया था। कुछ बातें वो सहन तक नहीं कर सकती थी। दिन रात उसका रोते-गाते बीत जाया करता था। सोनी को यह गहरे घाव गैरों से नहीं अपनों और नाते-रिश्तेदारों से मिले थे। इस दुख में सोनी के साथ सिर्फ उसका पति था। क्योंकि सच्चाई केवल वह ही जानता था। पति-पत्नी दोनों में शारीरिक कमी और खामियां थी। पत्नी का दोनों ट्यूब ब्लॉक था। वहीं पति को “ऐजू सपर्मिया” था।
दोनों इलाज करा-करा कर थक-हार चुके थे। सोनी मां बनने की उम्मीद खो चुकी थी। सोनी बताती है भला हो रांची के डॉ. उमा शंकर वर्मा का जिन्होंने मेरी सूनी गोद भर दी। शादी के करीब 14 साल बाद वह मां बनी। अब यही दुख सोनी की बेटी पायल को है। पायल भी बीते 3 सालों से परेशान है। कई शहरों में वह इलाज करा कर थक चुकी है। पायल अपनी मां सोनी के साथ एक बार फिर रांची आई। वह भी डॉ. वर्मा से मिली। पायल को भी उम्मीद है कि उसका भी आंगन किलकारियों से गुलजार होगा। वहीं बांझ कहलाने वाली सोनी को मां का रुतबा देने वाले डॉ. वर्मा भी खुश है। हालांकि उनका कहना है इलाज के साथ साथ यह ईश्वर का चमत्कार है।

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