RANCHI : राज्य सरकार का प्रयास है कि झारखंड से जो भी श्रमिक भाई एवं अन्य लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य अथवा देशों में जाते हैं, उनका हम पूरा डाटा बेस तैयार कर सकें और नीति के तहत उन्हें विपत्ति के समय मदद पहुंचा सकें। निश्चित रूप से विगत कोरोना संक्रमण काल में झारखंड के लिए माइग्रेशन बहुत बड़ा और बहुत ही चिंतनीय विषय महसूस हुआ है। वैश्विक संक्रमण ने कई चीजों पर हमें विचार करने के लिए बाध्य किया है। महामारी के समय कुछ अच्छी चीजें और कुछ बुरी चीजों को दृष्टिगत रखते हुए पलायन से संबंधित विशेष नीति बनाने की जरूरत महसूस हुई। महामारी ने कई पहलुओं पर सोच-विचार करने के रास्ते खोले हैं।
यह बातें मुख्यमंत्री ने गुरुवार को झारखंड मंत्रालय स्थित सभागार में आयोजित Safe and Responsible Migration Initiative (SRMI) के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के तहत हुनर एवं रोजगार की बेहतर व्यवस्था तलाशने का काम सरकार निरंतर कर रही है। राज्य में विकास के पैमाने अनेक हैं। उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई ऐसे संसाधन हैं, जिससे रोजगार सृजन किए जा सकते हैं। इन संसाधनों को आधुनिक बनाकर अधिक से अधिक रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकता है। राज्य सरकार स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित किए जाने को लेकर विचार कर रही है। जल्द ही राज्य में स्किल यूनिवर्सिटी की भी स्थापना की जाएगी।
प्रवासी श्रमिकों को किस प्रकार मिलेगी मदद
वर्तमान में Safe and Responsible Migration Initiative (SRMI) पायलट प्रोजेक्ट के तहत दुमका, पश्चिमी सिंहभूम तथा गुमला के श्रमिकों के पलायन को ध्यान में रखकर नीति बनाई गई है। इन तीन जिलों से दिल्ली, केरल और लेह-लद्दाख इत्यादि जगहों में रोजगार के लिए गए प्रवासी श्रमिकों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इन सभी राज्यों से समन्वय स्थापित कर प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और कानूनी हक सुनिश्चित किए जाएंगे। प्रवासी श्रमिकों का किसी भी प्रकार से शोषण न हो सके इस निमित्त नियम बनाई गई है। शुरुआती दौर में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद व्यवस्था के दायरे को और बड़ा बनाया जा सकेगा।
रोजगार और बेहतर जीवन के लिए करना पड़ता है माइग्रेट
मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार के बेहतर साधन के लिए राज्य के लोग देश के अलग-अलग राज्यों एवं विदेश में भी पलायन करते हैं। अपने जीवन स्तर को सकारात्मक दिशा की ओर ले जाने के लिए स्वाभाविक है कि हमें दूसरे जगहों पर पलायन करना पड़ता है। इन सभी चीजों को मद्देनजर रखते हुए माइग्रेशन पर राज्य सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए ठोस नियम-व्यवस्था बनाने का कार्य प्रतिबद्धता के साथ कर रही है। कभी-कभी प्रवासी श्रमिक भाइयों की मृत्यु से संबंधित अप्रिय खबरें भी आती हैं। अगर दुर्भाग्यवश किसी प्रवासी श्रमिक की मृत्यु होती है तो राज्य सरकार उनके दिवंगत शरीर को वापस उनके घर लाने की व्यवस्था करेगी तथा अंत्येष्टि का पूरा खर्चा राज्य सरकार ही वहन करेगी। इसके लिए सभी जिलों में कॉरपस फंड की व्यवस्था की जा रही है।
श्रमिकों के संरक्षण के लिए ई-श्रम पोर्टल कारगर
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के प्रवासी मजदूरों को संरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा ई-श्रम पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल के तहत प्रवासी श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है, ताकि विपत्ति के समय राज्य सरकार उन्हें तत्काल मदद पहुंचा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश इत्यादि राज्यों से रेस्क्यू कर लाई गई युवतियों एवं महिलाओं को भी टेक्सटाइल इंडस्ट्री में रोजगार देने का काम राज्य सरकार ने हाल के दिनों में किया है। दो हजार नियुक्ति पत्र टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बांटे गए थे, जिसमें 80% महिलाएं थीं।
संक्रमण के दौरान झारखंड में सबसे बेहतर काम हुआ
श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में संक्रमण काल में झारखंड ने सबसे बेहतर कार्य कर दिखाया है। राज्य में आज तक प्रवासी श्रमिकों का सही-सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं था, परंतु हमारी सरकार ने वैश्विक महामारी के दौरान एक-एक प्रवासी श्रमिकों का डाटाबेस तैयार करने का काम किया है। मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने Safe and Responsible Migration Initiative (SRMI) के सभी सहयोगियों को शुभकामनाएं दीं। कहा कि ह्यूमन माइग्रेशन के कई पहलू हैं। माइग्रेशन सिर्फ नकारात्मक ही नहीं, बल्कि सकारात्मक भी होता है।
माइग्रेशन पुराने जमाने से चला आ रहा है। कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से में रह सकता है। लोग जीवन की बेहतरी के लिए पलायन करते हैं। राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों के पलायन को सुरक्षित बनाने के लिए पॉलिसी बनाने का काम किया है। मुझे विश्वास है कि Safe and Responsible Migration Initiative (SRMI) मजदूरों के सुरक्षित पलायन में मील का पत्थर साबित होगा। मौके पर सीएम के हाथों BOCW के अंतर्गत विवाह सहायता योजना, मातृत्व प्रसुविधा योजना, अंत्येष्टि सहायता योजना, झारखंड निर्माण कर्मकार मृत्यु/दुर्घटना सहायता योजना एवं मेधावी पुत्र-पुत्री छात्रवृत्ति सहायता योजनाओं का लाभ सभागार में उपस्थित लाभुकों के बीच वितरित किया गया।
इनकी रही मौजूदगी
मौके पर मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो, मनरेगा आयुक्त बी.राजेश्वरी, श्रम आयुक्त ए. मुथुकुमार, SRMI के सहयोगी फिया फाउंडेशन के स्टेट हेड जॉनसन टोपनो, एसोसिएट प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस हैदराबाद डॉ. अश्विनी, निदेशक सीएमआईडी विनय पीटर, एसोसिएट इन्वेस्टमेंट ओमीदयर नेटवर्क इंडिया एवं पीडीएजी के प्रतिनिधि एवं अन्य मौजूद थे।
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