Chouparan : बंजर वनभूमि को फिर से हरियाली से आच्छादित करने और जंगलों को अतिक्रमण व अवैध चराई से बचाने के लिये वन विभाग करोड़ो रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन चौपारण क्षेत्र में वन सुरक्षा के लिये बन रहे पिलरों के निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगने शुरू हो गये हैं। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना के तहत बनाये जा रहे पिलरों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। मामले को लेकर जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। खबर है कि वन विभाग द्वारा बंजर वनभूमि की सुरक्षा और पौधारोपण को संरक्षित करने के लिये करीब 6 हजार पिलरों का निर्माण कराया जा रहा है। इन पिलरों में बाद में कंटीले तार लगाए जायेंगे, ताकि जंगल को अवैध चराई और अतिक्रमण से बचाया जा सके। निर्माण कार्य 16 हैज 81 रेंज कार्यालय परिसर से जुड़ी वनभूमि में कराया जा रहा है।
मिक्सर मशीन में घटिया डस्ट डालने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पिलर निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि मिक्सर मशीन में निम्न गुणवत्ता का डस्ट, बालू और अन्य सामग्री मिलाई जा रही है, जिससे पिलरों की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत से ही निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई, तो जंगल सुरक्षा की पूरी योजना पर असर पड़ सकता है। विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पिलर निर्माण के बाद उसकी मजबूती के लिये कम से कम 10 दिनों तक नियमित रूप से पानी दिया जाना चाहिये, लेकिन कई स्थानों पर यह प्रक्रिया सही ढंग से नहीं अपनाई जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय मजदूरों और संवेदकों को काम देने के बजाय बाहर से संवेदक बुलाकर निर्माण कराया जा रहा है।
“हरियाली की योजना में भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिये”
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पर्यावरण संरक्षण और वन विकास के लिए बड़ी राशि खर्च कर रही है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में अनियमितता होती है तो योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाये और यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाये। वहीं, मामले पर प्रदेशिक वन प्रक्षेत्र के वनपाल संटू कुमार ने कहा कि पिलर निर्माण का कार्य पूरी तरह सरकारी मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी पिलरों का निर्माण पूरा कर लिया जायेगा। इसके बाद वन सुरक्षा के लिये कंटीले तार लगाये जायेंगे, जिससे बंजर भूमि पर हरियाली लौटाने और जंगलों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
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