Kohramlive : भारत के एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की सुरक्षा जांच का तरीका जल्द पूरी तरह बदलने वाला है। अब एयरपोर्ट पर मैनुअल तलाशी और बार-बार की जांच की झंझट कम हो सकती है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) ने देशभर के हवाई अड्डों पर चरणबद्ध तरीके से फुल बॉडी स्कैनर (Full Body Scanner) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्तमान में दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोचीन एयरपोर्ट पर इसका ट्रायल चल रहा है। यदि ट्रायल सफल रहा और सभी नियामकीय मंजूरियां मिल गई, तो सबसे पहले संवेदनशील एयरपोर्ट्स पर इस तकनीक को लागू किया जायेगा। इसके बाद धीरे-धीरे देश के अन्य बड़े हवाई अड्डों तक इसका विस्तार होगा।
ये है फुल बॉडी स्कैनर
फुल बॉडी स्कैनर एक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली है, जो यात्री के शरीर पर या कपड़ों के भीतर छिपाई गई संदिग्ध वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम है। यह पारंपरिक मेटल डिटेक्टर से कहीं अधिक उन्नत तकनीक मानी जा रही है। यात्री को एक विशेष स्कैनिंग बूथ में कुछ सेकंड के लिये खड़ा होना होगा। मशीन शरीर के बाहरी हिस्से को स्कैन कर सुरक्षा कर्मियों को यह जानकारी देगी कि कहीं कोई संदिग्ध वस्तु तो नहीं छिपी है।
ऐसे काम करती है यह तकनीक
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक फुल बॉडी स्कैनर कम शक्ति वाली मिलीमीटर-वेव (Millimeter Wave) तकनीक का उपयोग करते हैं। यह तकनीक रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगों के जरिये शरीर और उसके ऊपर मौजूद वस्तुओं का विश्लेषण करती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें एक्स-रे जैसी हानिकारक किरणों का उपयोग नहीं होता। वहीं, यह किसी व्यक्ति की वास्तविक तस्वीर नहीं दिखाता, बल्कि एक सामान्य मानव आकृति पर केवल संदिग्ध हिस्सों को चिन्हित करता है, जिससे गोपनीयता भी सुरक्षित रहती है। फिलहाल भारतीय एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की जांच डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और हैंडहेल्ड डिटेक्टर के जरिये की जाती है। जरूरत पड़ने पर CISF कर्मी मैनुअल तलाशी भी लेते हैं। लेकिन इन प्रणालियों की सबसे बड़ी सीमा यह है कि वे मुख्य रूप से धातु से बनी वस्तुओं का ही पता लगा पाती हैं। प्लास्टिक विस्फोटक, सिरेमिक हथियार या अन्य गैर-धातु वस्तुएं कई बार आसानी से पकड़ में नहीं आतीं।फुल बॉडी स्कैनर इस कमी को दूर करेगा और धातु के साथ-साथ नॉन-मेटैलिक खतरों की पहचान भी कर सकेगा।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को कम समय में सुरक्षा जांच पूरी करने में मदद मिलेगी। यदि स्कैनिंग के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिलती है, तो यात्री सीधे आगे बढ़ सकेंगे। इससे अनावश्यक शारीरिक तलाशी की जरूरत कम हो जायेगी और सुरक्षा जांच अधिक तेज और सुविधाजनक बनेगी। हालांकि बैग, लैपटॉप और अन्य सामान की जांच पहले की तरह एक्स-रे मशीनों से ही होती रहेगी।
तीन महीने तक होगा परीक्षण
मई 2026 से शुरू हुये तीन महीने के ट्रायल के दौरान अधिकारियों द्वारा कई पहलुओं का आकलन किया जा रहा है। इसमें तकनीक की सटीकता, यात्रियों की सुविधा, परिचालन क्षमता और गोपनीयता सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। परीक्षण के परिणामों के आधार पर देशव्यापी विस्तार को लेकर अंतिम निर्णय लिया जायेगा।
इन एयरपोर्ट्स को मिलेगी प्राथमिकता
BCAS के दिशा-निर्देशों के अनुसार सबसे पहले उन एयरपोर्ट्स पर फुल बॉडी स्कैनर लगाये जायेंगे, जहां सुरक्षा चुनौतियां अधिक हैं। इनमें अयोध्या, जम्मू और श्रीनगर जैसे संवेदनशील हवाई अड्डे शामिल हैं। इसके अलावा ऐसे एयरपोर्ट, जहां हर साल 50 लाख से अधिक यात्री आते हैं, उन्हें भी प्राथमिकता दी जायेगी।
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