Bihar : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 40-50 की उम्र पार करते ही लोग ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तनाव और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों से जूझने लगते हैं। लेकिन बिहार के कैमूर जिले का एक छोटा-सा गांव इन तमाम धारणाओं को चुनौती देता नजर आता है। इस गांव में 90 वर्ष से अधिक उम्र के कई बुजुर्ग न सिर्फ स्वस्थ हैं, बल्कि अपने दैनिक कामकाज भी खुद करते हैं। कोई खेत में काम करता दिख जायेगा तो कोई सुबह की सैर पर। यही वजह है कि बारवां कला गांव देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
लंबी उम्र का ‘जीवंत गांव’ बन चुका है बारवां कला
कैमूर जिले का बारवां कला गांव लंबे समय से अपनी अनोखी जीवनशैली के लिये जाना जाता है। गांव में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग हैं जिनकी उम्र 85 से 100 वर्ष के बीच है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई बुजुर्ग आज भी दूसरों पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती-बाड़ी, पशुपालन और घर के कामों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। गांव पहुंचने वाला हर व्यक्ति यहां के बुजुर्गों की फुर्ती देखकर हैरान रह जाता है।
ये है इतनी लंबी उम्र का राज?
जब गांव के लोगों से उनकी सेहत का रहस्य पूछा जाता है तो जवाब बेहद सरल मिलता है, शुद्ध भोजन, नियमित दिनचर्या और तनाव से दूरी। ग्रामीण बताते हैं कि उनके भोजन में आज भी वही चीजें शामिल हैं जो वर्षों पहले थीं। गांव के लोगों की थाली में घर का ताजा बना भोजन, खेतों का अनाज, हरी सब्जियां, दूध और दही, मौसमी फल, कम तेल-मसाले वाला खाना शामिल होते हैं। फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ से कोसों दूर रहते हैं।
सूरज के साथ शुरू होता है दिन
बारवां कला के बुजुर्गों की दिनचर्या भी आधुनिक जीवनशैली से बिल्कुल अलग है। वे सुबह जल्दी उठते हैं, पैदल चलते हैं और नियमित शारीरिक श्रम करते हैं। खेतों में काम करना उनके लिये व्यायाम जैसा है। प्रकृति के करीब रहने की यह आदत उनके शरीर को सक्रिय बनाये रखती है।
तनाव नहीं, सुकून है जिंदगी का हिस्सा
विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी उम्र में मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। गांव के लोग सामाजिक रूप से जुड़े रहते हैं, परिवार के साथ समय बिताते हैं और अनावश्यक तनाव से दूर रहते हैं। यही कारण है कि उम्र बढ़ने के बावजूद उनमें मानसिक और शारीरिक ऊर्जा बनी रहती है। बारवां कला गांव की चर्चा सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रही।स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भी यहां की जीवनशैली का अध्ययन किया है। उनका मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और तनावमुक्त वातावरण बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र के प्रमुख कारण हो सकते हैं। मोबाइल, फास्ट फूड और तनाव से घिरी आधुनिक जिंदगी के बीच बारवां कला एक अलग तस्वीर पेश करता है। यह गांव बताता है कि लंबी उम्र का कोई जादुई फॉर्मूला नहीं होता। अच्छी आदतें, सादा जीवन, शुद्ध भोजन और नियमित मेहनत ही स्वस्थ जीवन की असली पूंजी हैं।
बारवां कला से सीख
- ताजा और शुद्ध भोजन खायें
- रोज शारीरिक गतिविधि करें
- सुबह जल्दी उठने की आदत डालें
- तनाव से दूरी बनायें
- परिवार और समाज से जुड़े रहें
- प्रकृति के करीब रहें
- लंबी उम्र की तलाश किसी दवा में नहीं, बल्कि जीवन जीने के सही तरीके में छिपी है।
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