UP : कभी एक मासूम बच्चे की हत्या कर अपराध के दलदल में धंसने वाले 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश एनकाउंटर में मारा गया। 10 साल की उम्र में पहली बार खून से हाथ रंगने वाला महताब उर्फ ‘बेचैन’ करीब ढाई दशक तक पुलिस के लिये सिरदर्द बना रहा। हत्या, लूट, रंगदारी और डकैती जैसे दर्जनों मामलों में वांछित यह कुख्यात बदमाश आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। बीते शुक्रवार तड़के बाबरी क्षेत्र के गांव हाथी करौदा निवासी दो किसान भाई नरेंद्र और नरेशपाल खेतों में पानी पटाने जा रहे थे। आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के जलालपुर कट के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। हथियार के दम पर मोबाइल फोन, बाइक की चाबी और नकदी लूटने के बाद बदमाश फायरिंग करते हुये फरार होगये। पीड़ितों की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और पूरे जिले में घेराबंदी शुरू कर दी गई। यह एनकाउंटर यूपी के शामली में हुई।
एक घंटे बाद खत्म हुई भागने की कहानी
लूट की वारदात के करीब एक घंटे बाद, लगभग 12 किलोमीटर दूर कांधला क्षेत्र की खंदरावली पुलिया के पास पुलिस और बदमाशों का आमना-सामना हो गया। पुलिस के अनुसार बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में 50 हजार रुपये का ईनामी हिस्ट्रीशीटर महताब गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका साथी खेतों के रास्ते भाग निकला। मुठभेड़ में आदर्श मंडी थाने के दरोगा दीपचंद भी हाथ में गोली लगने से घायल हुये। दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने महताब को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने महताब के कब्जे से किसानों से लूटा गया मोबाइल फोन, नकदी, बाइक की चाबी, 9 एमएम पिस्टल, कार्बाइन, 13 गोलियां, आठ खोखे और बिना नंबर की बाइक बरामद की है।फरार बदमाश की तलाश जारी है।
10 साल की उम्र में लिखा था अपराध का पहला अध्याय
महताब का नाम पहली बार तब सुर्खियों में आया था, जब वर्ष 2000 में उसने महज 10 साल की उम्र में 12 साल के आरिफ की हत्या कर दी थी। इल्जाम है कि वह अपने साथियों के साथ आरिफ को घर से बुलाकर ले गया और उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। अगले दिन बच्चे का शव बरामद हुआ। इस मामले में महताब समेत तीन नाबालिग आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था, जिसकी सुनवाई आज भी जुवेनाइल कोर्ट में लंबित है। समय के साथ महताब का नाम शामली, सहारनपुर, हरियाणा के पानीपत और आसपास के इलाकों में अपराध का पर्याय बन गया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी और जानलेवा हमले समेत करीब 47 मुकदमे दर्ज थे। वह कैराना थाने का हिस्ट्रीशीटर था और कुख्यात मुकीम काला गैंग का सक्रिय सदस्य माना जाता था। पुलिस उसके कर्नाटक कनेक्शन की भी जांच कर रही है। इधर, पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार शाम करीब छह बजे महताब का जनाजा उसके घर से निकला और कैराना की टीचर्स कॉलोनी स्थित पैतृक कब्रिस्तान में उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
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