Hazaribagh : हजारीबाग के केरेडारी थाना क्षेत्र के कंडाबेर गांव में 13 दिन पहले अवैध कोयला खदान में समाये प्रमोद साव, उमेश कुमार सिंह एवं नौशाद आलम की लाशें निकाली गई। इससे पहले प्रशासन आया, देखा और लौट गया। लेकिन गांव ठहरा मिट्टी और रिश्तों से बना, उसने हार नहीं मानी। NDRF की टीमें आईं, लेकिन मलबे और पानी ने हार न मानने दी। गांव के नौजवान, खेतों से फावड़ा छोड़, खदान में उतर गये। माएं बैठीं अपने बेटों के इंतजार में, लेकिन गांव के सीने में हिम्मत की लौ जलती रही। पानी ने मलबे को सीने में दबा रखा था, लेकिन गांव ने ठान लिया था कि अपने लालों को लौटाये बिना सांस नहीं लेंगे। NTPC और एक निजी कंपनी ने उपकरण दिये, पर हिम्मत तो ग्रामीणों की थी। सोमवार की देर रात, खदान से तीनों शव निकाले गये। मिट्टी में दबे प्रमोद, उमेश और नौशाद अब सदा के लिये खामोश हैं। लेकिन गांव बोल उठा, “हम हारे नहीं, हमने उन्हें पाया”। परिजनों ने मुआवजा और नौकरी की मांग की है। प्रशासन अभी चुप है, लेकिन गांव बोल रहा है, “हम अपनों को अकेला नहीं छोड़ते।”अंचलाधिकारी रामरतन बरनवाल बोले, “NDRF की कोशिशें नाकाम रहीं, लेकिन गांव और NTPC की मदद से शव बाहर निकाले गये। ये जज्बे की जीत है।”
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