West Bengal : पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल के बीच TMC (तृणमूल कांग्रेस) प्रमुख और पूर्व CM ममता बनर्जी को कोलकाता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। फिलहाल विधानसभा स्पीकर का फैसला प्रभावी रहेगा और ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे। न्यायमूर्ति Krishna Rao की एकल पीठ ने TMC नेता Sobhandeb Chattopadhyay की याचिका पर सुनवाई करते हुये कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई आधार नहीं दिखता, जिसके आधार पर अंतरिम राहत दी जाये। अदालत ने दोनों पक्षों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की है।
क्या है पूरा राजनीतिक विवाद?
दरअसल, बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद TMC के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट उभरकर सामने आया। पार्टी से निष्कासित किये जा चुके ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक हैं। बागी गुट ने खुद को विधानसभा में अलग शक्ति के रूप में पेश किया और ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा। बागी गुट का कहना था कि वह ममता बनर्जी को नेता मानता है, लेकिन पार्टी के संगठनात्मक नेतृत्व और निर्णयों को लेकर उसकी अलग राय है। इस घटनाक्रम ने TMC के भीतर गहरी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।
स्पीकर के फैसले ने बढ़ाया सियासी तूफान
राजनीतिक विवाद तब और गहरा गया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर Rathindra Bose ने बागी गुट के दावे को स्वीकार करते हुये ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। इसके बाद TMC के आधिकारिक खेमे ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि नेता प्रतिपक्ष के चयन का अधिकार आधिकारिक राजनीतिक दल का होता है, न कि केवल विधायी दल का। TMC नेताओं ने स्पीकर के फैसले को संवैधानिक परंपराओं और विधायी नियमों के खिलाफ बताया। हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत देने से इनकार किये जाने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है कि अंतिम फैसला आने तक ऋतब्रत बनर्जी ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष बने रहेंगे।
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