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मा’रे गये गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पूरी कहानी… जानें

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Ranchi : झारखंड के संगठित अपराध जगत का एक बड़ा अध्याय रविवार रात समाप्त हो गया। राज्य के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में शुमार सुजीत सिन्हा पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। साहिबगंज जेल से धनबाद सेंट्रल जेल शिफ्टिंग के दौरान जामताड़ा के केनेबेड़ा जंगल के पास हुई मुठभेड़ में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। पुलिस के अनुसार उसने पुलिस अभिरक्षा से भागने की कोशिश की, एक जवान की राइफल छीन ली और फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। सुजीत सिन्हा का अंत उस अपराध नेटवर्क के पतन का प्रतीक भी है, जिसने करीब दो दशकों तक पलामू से लेकर रांची, धनबाद, लातेहार, गढ़वा और चतरा तक रंगदारी और लेवी का समानांतर तंत्र खड़ा कर रखा था। सुजीत सिन्हा मूल रूप से पलामू के हुसैनाबाद प्रखंड के पथरा गांव का रहने वाला था। उसका बचपन मेदिनीनगर शहर के श्रीरामपथ इलाके में बीता। परिवार में बड़ा भाई, बहन और पत्नी रिया सिन्हा हैं। उसकी पत्नी भी आपराधिक मामलों में जेल में बंद रही है। मां बड़े बेटे के साथ दूसरे शहर में रहती हैं। साधारण परिवार से निकलकर सुजीत ने अपराध की दुनिया में ऐसा रास्ता चुना कि कुछ ही वर्षों में उसका नाम झारखंड के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में लिया जाने लगा।

2007 का डबल मर्डर बना टर्निंग प्वाइंट

सुजीत सिन्हा पहली बार वर्ष 2007 में पूरे राज्य की सुर्खियों में आया। पलामू के टाउन थाना क्षेत्र स्थित कान्दू मोहल्ला में अनिल सिंह और भूषण सिंह नामक दो भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हत्याकांड टेंडर विवाद से जुड़ा था और पुलिस जांच में सुजीत सिन्हा को इसका मास्टरमाइंड बताया गया। इसी घटना ने उसे अपराध जगत में बड़ी पहचान दिलाई। वर्ष 2019 में पलामू की अदालत ने इस दोहरे हत्याकांड में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद भी उसके गिरोह की गतिविधियां पूरी तरह नहीं रुकीं।

जेल से चलता रहा गैंग का नेटवर्क

पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल में बंद रहने के बावजूद सुजीत सिन्हा अपने गिरोह का संचालन करता रहा। उस पर कोयला कारोबार, सड़क निर्माण, ठेकेदारी, क्रशर, ट्रांसपोर्ट और अन्य व्यवसायों से लेवी वसूलने के आरोप लगे। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी, लेवी वसूली, आर्म्स एक्ट और आपराधिक षड्यंत्र समेत करीब 75 मामले दर्ज बताये जाते हैं। उसका नेटवर्क पलामू से निकलकर गढ़वा, लातेहार, रांची, धनबाद, चतरा और अन्य जिलों तक फैल चुका था।

2024 में कई मामलों में बरी, फिर भी बना रहा खौफ

वर्ष 2024 में सुजीत सिन्हा को पलामू की अदालतों से 16 से अधिक मामलों में राहत मिली। हालांकि कई अन्य गंभीर मामले उसके खिलाफ लंबित रहे। इसी दौरान पलामू पुलिस ने उसके संबंध धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के नेटवर्क से जुड़े होने की बात भी जांच में सामने रखी थी। पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष से रंगदारी मांगने जैसे चर्चित मामलों में भी उसका नाम उछला, हालांकि कुछ मामलों में उसे अदालत से राहत मिली।

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