Jamtada : झारखंड के संगठित अपराध जगत का एक बड़ा अध्याय रविवार रात उस समय समाप्त हो गया, जब राज्य के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में शुमार सुजीत सिन्हा पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। जामताड़ा थाना क्षेत्र में साहिबगंज-गोविंदपुर हाईवे स्थित केनेबेड़ा जंगल के समीप हुई इस मुठभेड़ ने वर्षों से रंगदारी, लेवी और संगठित अपराध का पर्याय बन चुके सुजीत सिन्हा के आपराधिक सफर पर हमेशा के लिये विराम लगा दिया।
शुरूआती जानकारी के अनुसार, सुजीत सिन्हा को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच साहिबगंज जेल से धनबाद सेंट्रल जेल ले जाया जा रहा था। रात करीब नौ बजे जामताड़ा क्षेत्र में कैदी वाहन पंचर हो गया। इसी दौरान उसके गिरोह के सदस्य मौके पर पहुंच गये। पुलिस का दावा है कि मौके का फायदा उठाकर सुजीत सिन्हा ने एक जवान की इंसास राइफल छीन ली और पुलिस पर फायरिंग करते हुये भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस कप्तान शंभू कुमार सिंह सहित जिले के कई आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे। पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाये, जबकि कुछ समय तक हाईवे पर यातायात भी प्रभावित रहा। देर रात तक पुलिस ने विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि पूरे घटनाक्रम का खुलासा प्रेस वार्ता में किया जायेगा। एनकाउंटर के बाद पुलिस ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। आशंका जताई जा रही है कि मौके पर पहुंचे गिरोह के कुछ सदस्य जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए। उनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और पुलिस टीम के बयानों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
झारखंड के अपराध जगत का बड़ा नाम था सुजीत सिन्हा
पलामू जिले का रहने वाला सुजीत सिन्हा वर्षों तक झारखंड में संगठित अपराध का बड़ा चेहरा बना रहा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लेवी वसूली, आर्म्स एक्ट, आपराधिक षड्यंत्र और संगठित अपराध समेत लगभग 75 आपराधिक मामले दर्ज थे। उसका प्रभाव सिर्फ पलामू तक सीमित नहीं था। उसका नेटवर्क गढ़वा, लातेहार, रांची, धनबाद, चतरा और अन्य जिलों तक फैला हुआ था। कोयला कारोबार, सड़क निर्माण, ठेकेदारी, क्रशर उद्योग, ट्रांसपोर्ट और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों में लेवी वसूली उसके गिरोह की पहचान बन चुकी थी।
जेल की सलाखों के पीछे से चलता था ‘साम्राज्य’
पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, कई बार गिरफ्तार होने और जेल भेजे जाने के बावजूद सुजीत सिन्हा का नेटवर्क कमजोर नहीं पड़ा। आरोप है कि वह जेल के भीतर से ही अपने गिरोह का संचालन करता था। उसके इशारे पर रंगदारी, धमकी और लेवी वसूली का पूरा तंत्र सक्रिय रहता था। यही वजह थी कि सुरक्षा कारणों से उसे समय-समय पर अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित किया जाता रहा। हाल के दिनों में भी खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि उसके समर्थक उसे छुड़ाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी कारण साहिबगंज से धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया था।
कैसे अपराध की दुनिया का बड़ा चेहरा बना?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुजीत सिन्हा ने अपराध की दुनिया में छोटे स्तर से शुरुआत की, लेकिन देखते ही देखते उसने अपना संगठित गिरोह खड़ा कर लिया। लेवी वसूली, ठेकेदारों को धमकी, कारोबारियों से रंगदारी और हथियारों के दम पर उसने कई जिलों में अपना प्रभाव कायम किया। समय के साथ उसका नाम झारखंड के सबसे सक्रिय और खतरनाक गैंगस्टरों में गिना जाने लगा।
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