कोहराम लाइव डेस्क : Current ने ली भैंस की जान, नाराज मालिक ने किया पूरे गांव को परेशान। दामोदर हेड वर्क्स जामाडोबा में लगातार बिजली का फाल्ट होने के कारण झरिया एवं पुटकी की जलापूर्ति प्रभावित हो जाती है। दो दिन से यह समस्या बनी हुई है। इससे पहले भी यहां कई बार ऐसा हो चुका है। एटक माडा के उप महासचिव मो. असलम बताते हैं कि नवंबर 2019 में जैतपुर खटाल में बिजली का तार गिर जाने के कारण दो भैंस मर गई थी। उसके मालिक ने आज तक बिजली तार जोड़ने नहीं दिया।
नाराज मालिक लाइन (Current) को नहीं जोड़ने दे रहे
Current लगने से मर गई भैंस तो मालिक एक साल से नहीं जोड़ने दे रहा है तार। नतीजा यह निकला कि जरा सी बिजली समस्या होने पर जलापूर्ति ठप हो जाती है।
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Low Voltage Current की बनी रहती है समस्या
मो. असलम ने कहा – L&T के फीडर से माडा को बिजली मिल रही है। Low Voltage Current की समस्या बनी रहती है। सीधे डीवीसी से बिजली कनेक्शन न होने पर इसका सीधा असर झरिया से लेकर केंदुआ-पुटकी तक की लगभग 12 लाख की आबादी पर हो रहा है। इसमें माडा के पदाधिकारी, एमडी और तकनीकी सदस्य भी चुप्पी साधे हुए हैं।
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बिजली न मिलने के कारण हर दिन लाखों गैलन पानी बर्बाद
J.M.D.A. के जामाडोबा और पुटकी संयत्र को सीधे बिजली न मिलने के कारण हर दिन लाखों गैलन पानी बर्बाद होता है। कई दिनों तक जलापूर्ति भी बाधित रहती है। इस समस्या के समाधान के लिए दो माह पहले माडा, डीवीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड से सीधे संयंत्र को बिजली आपूर्ति की योजना बनाई थी। माडा ने JBVNL को पत्र लिखकर जामाडोबा और पुटकी जल संयत्र को बिजली देने के लिए एक डेडीकेटेड लाइन देने का प्रस्ताव भी दिया।
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योजना पर कुल 95 लाख की लागत
इस योजना पर लगभग 95 लाख खर्च होने का अनुमान भी लगाया गया। इसका जिक्र भी इस प्रस्ताव में किया गया था। डेडीकेटेड लाइन हो जाने से बिजली कटने की स्थिति में भी इन दोनों जन संयंत्रों से जलापूर्ति होगी, लेकिन अभी तक ऐसा हो नहीं सका। दरअसल बिजली कटने के बाद एक जल संयंत्र को दोबारा चालू करने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। इस बीच संयंत्र और पाइपलाइन का पानी बर्बाद हो जाता है।
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