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बैग बनाते-बनाते खड़ी कर दी सालाना 200 करोड़ टर्नओवर की कंपनी

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  • स्टीलबर्ड हेलमेट कंपनी के संस्‍थापक सुभाष कपूर ने हासिल की है यह बड़ी कामयाबी
  • 1956 में सुभाष ने शुरू किया था बैग बनाने का काम
  • स्कूली शिक्षा के समय मुश्किल से आते थे सिर्फ पासिंग मार्क्स
  • आज के समय में कई देशों में हेलमेट और एक्‍सेसरी का निर्यात करती है कंपनी

कोहराम लाइव डेस्‍क : छोटे-छोटे बैग बनाकर 25 पैसे का प्रॉफिट कमाने वाला कोई व्यक्ति 200 करोड़ सालाना टर्नओवर की कंपनी भी खड़ा कर सकता है, यह सुनने में संभव नहीं लगता है, पर यह है सौ फीसदी सच। जी हां, हम बात कर रहे हैं आज के समय में पूरे देश में फेमस स्टीलबर्ड हेलमेट के संस्‍थापक सुभाष कपूर की, जिन्‍होंने यह सच कर दिखाया है। वास्‍तव में 74  वर्षीय इस शख्‍स के संघर्ष की कहानी 1956 में शुरू हुई थी, जब उन्होंने बैग बनाने का काम शुरू किया था।

बचपन में किया है ऑयल फिल्टर बनाने का काम

स्टीलबर्ड हाई टेक इंडिया एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जो हेलमेट बनाती है। वर्तमान में कंपनी का सालाना टर्नओवर 200 करोड़ रुपये है। जानकारी के अनुसार, सुभाष ने एक समय कपड़े के बैग सिलने से लेकर ऑयल फिल्टर बनाने का काम किया है। उन्होंने फाइबर ग्लास प्रोटेक्शन गेयर बनाने का बिजनेस भी किया है। स्कूली शिक्षा के समय मुश्किल से उन्‍हें पासिंग मार्क्स ही आते थे।

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पाकिस्‍तान में कभी परिवार के थे 26 बिजनेस, विभाजन ने बना दिया गरीब

सुभाष और उनका परिवार पाकिस्तान के झेलम डिस्ट्रिक में रहता था। उनका परिवार विभाजन के बाद इंडिया आया। पाकिस्तान में उनके परिवार के 26 बिजनेस थे। इनमें यूटेंसिल्स, क्लोथ, ज्वैलरी और एग्रीकल्चर बिजनेस प्रमुख थे। उनके 13 कुएं थे, जिनसे 30 एकड़ जमीन की सिंचाई होती थी। उनके परिवार ने कश्मीर में पहला पेट्रोल पंप खोला था। विभाजन ने परिवार को अमीर से गरीब बना दिया।

विभाजन के समय पाकिस्तान से आए इंडिया

साल 1947 में लीलावंती अपने चार बेटों छरज, जगदीश, कैलाश और डेढ़ साल के सुभाष के साथ हरिद्वार में थीं, जब विभाजन की घोषणा हुई। तब उनके पास परिवार के साथ वापिस जाने का ऑप्शन ही नहीं था, इसलिए वह इंडिया में रुक गईं, जबकि उनके पिता तिलक राज कपूर पाकिस्तान में थे। विभाजन के समय पाकिस्तान से इंडिया आने में उनपर बीच रास्ते में अटैक हो गया। वह बच गए, लेकिन उनके पास कुछ नहीं बचा। परिवार एक हो गया और सरवाइवल के लिए सभी छोटे-मोटे काम करने लगे।

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हरिद्वार से चार साल बाद दिल्‍ली आया परिवार

कपूर परिवार हरिद्वार से दिल्ली चार साल बाद आया, लेकिन वह वक्त काफी परेशानी भरा था। उनकी ये स्ट्रगल 1956 तक चलती रही। एक दिन उनके पिता ने फैसला किया कि वह बिजनेस करेंगे, क्योंकि यह उनके  स्‍वभाव में था। उन्होंने अपनी वाइफ की ज्वैलरी बेची और एक छोटा बिजनेस शुरू कर दिया। वह नमक के लिए कपड़े के बैग बनाने लगे। उन्होंने कंपनी का नाम कपूर थाली हाउस रखा।

13 मार्च 1963 को रखी गई स्टीलबर्ड इंडस्ट्री की नींव

सुभाष कपूर ने 13 मार्च 1963 को स्‍टीलबर्ड कंपनी की नींव रखी थी। साल में वह ट्रैक्टर के लिए 280 तरह के ऑयल फिल्टर बनाने लगे। साल 1976 में उन्होंने हेलमेट बनाने का प्लान किया। 70 के दशक से पहले हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं था। 1976 में दिल्ली सरकार ने हेलमेट अनिवार्य कर दिया। वह फाइबर ग्लास कपंनी पिलकिंगटन लिमिटेड के लोगों को जानते थे, जिन्होंने उन्हें हेलमेट बनाने की जानकारी दी। सुभाष के मुताबिक वह दुकानदारों के दबाव में नहीं आए, क्योंकि उनको पता था कि उनके पास कोई ऑप्शन नहीं है। डिमांड के आधार पर उनका बिजनेस दौड़ने लगा और फिर उन्होंने साल 1980 में मायापुरी में अपना प्लांट खोला। अब सुभाष कपूर के बेटे राजीव कपूर स्टीलबर्ड हेलमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। आज के समय में स्टीलबर्ड कंपनी श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, ब्राजील, मॉरिशियस और इटली में हेलमेट और एक्सेसरी का निर्यात करती है।

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