नई दिल्ली : Himachal Pradesh अपनी खूबसूरत वादियों और घाटियों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हर साल अनगिनत लोग देश-विदेश से इन वादियों का दीदार करने आते हैं। Himachal की पहाड़ियों में सभ्यता और संस्कृति बसती है। इस प्रदेश में कई ऐसी जगह है, जो रहस्यमयी है। इनमें एक कमरूनाग झील है।
झील में छिपा है अरबों रुपये का खजाना
ऐसा कहा जाता है कि इस झील में खजाना छिपा है। इसके बारे में कई तथ्य हैं। जानकारों की मानें तो कमरूनाग झील में अरबों रुपये का खजाना है। हालांकि, अब तक इस झील से पैसे और जेवर नहीं निकाले गए हैं। इस झील के समीप एक मंदिर भी है, जिसे कमरूनाग मंदिर कहा जाता है। अगर आपको इस झील के बारे में नहीं पता है, तो आइए कमरूनाग के बारे में विस्तार से जानते हैं।
इसे भी पढ़ें : अभिनेता Faraaz Khan का 46 की उम्र में निधन, बॉलीवुड में शोक
लोगों की बाबा कमरूनाग के प्रति अटूट श्रद्धा है
इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा साल भर में केवल एक बार दर्शन देते हैं। जून महीने में बाबा प्रकट होते हैं। इसके लिए जून में मेले का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर काफी संख्या में लोग बाबा के दर्शन के लिए जमा होते हैं। इस दौरान लोग मनचाहा वर प्राप्ति के लिए झील में सोने चांदी और रुपये दान करते हैं।
बाबा कमरूनाग में अटूट श्रद्धा
मान्यता है कि बाबा कमरूनाग को सोना-चांदी चढ़ाने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इसके लिए लोग रुपये और जेवर झील में डालते हैं। कुछ लोग तो पहने जेवर भी झील में डालने से गुरेज नहीं करते हैं। लोगों की बाबा कमरूनाग में अटूट श्रद्धा है। सदियों से यह परंपरा चलती आ रही है। इसके चलते जानकारों का कहना है कि झील में अरबों का खजाना है।
कमरूनाग झील कहां है
हिमचाल प्रदेश के मंडी जिले से 51 किलोमीटर दूर करसोग घाटी में स्थित है। इस झील तक पहुंचने के लिए पहाड़ियों के बीच रास्ता है। ऐसा माना जाता है कि कमरूनाग झील के दृश्यों को देखकर सभी थकान दूर हो जाती है। इस स्थान पर पत्थर से निर्मित कमरूनाग बाबा की प्रतिमा है। हर साल जून में कमरूनाग मंदिर में मेला का आयोजन किया जाता है।
इसे भी पढ़ें : Arnab Goswami गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर संदेशों की बाढ़














