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मेरे यार ने जो किया, वह दुश्मन भी न करे… जिस दोस्त को पनाह दी, वही पत्नी को लेकर भाग गया

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उस पत्नी का अंत रांची में कैसे हुआ, देखिए…

रांची (रुपम/संजय कपरदार) : जानते हो भाई, एक हथियार है, जिसका नाम है खंजर। यह दुश्मन नहीं, जब कभी पीठ में खंजर घोंपता है, वह अपना ही होता है। चाहे वह दोस्त हो, यार हो या बाकी नाते रिश्तेदार। यह खंजर अपनों के लिए ही बना है। यही काम मेरे यार ने भी कर दिखाया। कितना भरोसा था उस पर मुझे। नाज भी था उसपर। हर सुख-दुख में साथ देता था, पर कभी यह मेरे मन में ख्याल आया ही नहीं कि वह मेरी ही पत्नी और बेटी को लेकर भाग जायेगा, बदले में पैसा मांगेगा। और फिर पत्नी का एक अजनबी शहर में खतरनाक अंत देख रूह कांप गयी। बस इतना ही कह सकता हूं कि दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है। मेरे दोस्त का नाम है सिद्धार्थ तिवारी। यह कहना है यूपी के फतेहपुर में रहने वाले आशीष कुमार का।

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आशीष की पत्नी नेहा उर्फ हेमा की लाश 16 फरवरी को खेलगांव थाना पुलिस ने अपने ही इलाके के एक मकान के अंदर से बरामद किया। नाक-नक्श से बेहद सुंदर नेहा के बारे में पुलिस बताती है कि उसकी लाश फांसी के फंदे पर लटक रही थी। वहीं पुलिस को उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। इधर आशीष कहता है, उसका मन यह मानने को तैयार नहीं कि नेहा फांसी लगा खुदकुशी कर सकती है। आठ साल उसने नेहा के साथ बिताये हैं। नेहा इतनी कमजोर नहीं थी कि वह खुद को मिटा लेती। यह सच है कि उसके सपने, उसके अरमान और शौक की डोर लंबी थी। इस डोर की छोर थाम रखी थी उसके जिगरी दोस्त सिद्धार्थ ने। हालत ऐसी हो गयी थी कि वह जैसा चाहता, वैसे नेहा को नचाता।

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पिछले दो साल से सिद्धार्थ का उसके घर में आना जाना था। दोस्ती ऐसी कि एक थाली में दोनों साथ खाते थे, पर कभी उसे शक नहीं हुआ कि पीठ पीछे क्या गुल खिला रहा है उसका दोस्त। वह तब हैरान और परेशान हो गया, जब बीते साल 4 नवंबर को वह उसकी पत्नी नेहा और तीन साल की बेटी हिमान्या को लेकर भाग गया। भागने से पहले उसने घर से नेहा का स्टेट बैंक आफ इंडिया का डेबिट कार्ड, सोने की चेन, कंगन, झुमका, अंगूठी, पायल साथ ले गया था। एटीएम से उसने 80 हजार रुपये निकाल लिये थे। 5 दिसंबर 2020 को नेहा की मां के पास फोन आया। उनसे कहा गया कि नतिनी हिमान्या को वापस चाहती हैं तो 20 हजार रुपये भेजो। सिद्धार्थ ने उन्हें अपना खाता संख्या और आईएफएससी कोड भेजा। 7 दिसंबर को 20 हजार रुपये भेजने के बाद बच्ची को छोड़ दिया, पर पत्नी को रखे रहा अपने साथ।

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आशीष कहता है, वह पागलों की तरह खोजता रहा अपनी पत्नी को। चिंता उसे अपनी नहीं, दोनों बेटियों की ज्यादा थी। वे रात भर अपनी मां को खोजती, याद करती और रोती रहती थीं। 7 साल की अनन्या और 3 साल की हिमान्या का रोना देख उसका कलेजा फट जाता था। कुछ दिन बाद एक बार फिर सिद्धार्थ का पैगाम आया कि अगर पत्नी वापस चाहते हो तो 2 लाख रुपये भेजो। प्राइवेट नौकरी करने वाले आशीष के बस की बात नहीं थी, फिर भी वह दोस्त से जानी दुश्मन बने सिद्धार्थ से कहता रहा, यार पहले पत्नी को ले आओ और मेरे पास जो भी संपत्ति है, ले जाओ। कम से कम मेरी मासूम बेटियों को उनकी मां लौटा दो। पर सिद्धार्थ का दिल नहीं पसीजा और फिर जो गुम हुआ, तो महीनों तक पता नहीं चला।

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अचानक 18 फरवरी 2021 को रांची पुलिस से उसे सूचना मिली की उसकी पत्नी फांसी लगा कर मर गयी है। आशीष तब दंग रह गया… कि रांची पुलिस को उसका नंबर कैसे मिला। और जिसकी लाश मिली, वह उसकी पत्नी नेहा ही है। यह दावा कैसे। जवाब में पुलिस ने सिर्फ इतना कहा, रांची आओ, सबकुछ जान जाओगे। आशीष कहता है, मैं अपनी सास के साथ रांची गया। रिम्स के शवगृह में पत्नी की लाश पड़ी थी। वहीं जिस घर में फांसी लगाने की बात बतायी गयी थी, उस घर में भी झांका, मकान मालिक से मिला। खेलगांव के एसएचओ (थानेदार) से लेकर डीएसपी तक से मिले, किसी ने कुछ नहीं बताया कि आखिर मेरी पत्नी रांची कैसे पहुंची। वहीं सिद्धार्थ का रांची से क्या कनेक्शन है, यह भी पता नहीं चला। सिद्धार्थ भी यूपी के फतेहपुर का ही रहने वाला है। आशीष का दावा है कि अगर रांची पुलिस पूरे मामले की गहराई से तहकीकात करेगी, तो चौंकानेवाली बातें सामने आयेंगी। पर पुलिस बहुत शिथिल और उदासीन है। उसने सिर्फ ये कहा कि सिद्धार्थ को पकड़कर 16 फरवरी को जेल भेज दिया गया है। सिद्धार्थ के ट़ार्चर से तंग आकर नेहा ने खुदकुशी कर ली है। आशीष और उसकी सास जब आसपास के लोगों से कुछ बिंदु पर जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें कहा गया कि ज्यादा दिमाग न लगायें। पत्नी की लाश लेकर अपने घर जायें और क्रियाकर्म करें। जब जरूरत होगी, फोन करेंगे, रांची चले आइएगा। इस कांड के आईओ सब इंस्पेक्टर श्यामजय कुमार सिंह हैं।

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