Ranchi : रांची के धुर्वा इलाके से रहस्यम तरीके गायब जुड़वां भाई ‘करण और अर्जुन’ को खोज निकालने में जुटी रांची पुलिस ने अर्जुन को सही-सलामत खोज निकाला। हालांकि उसका जुड़वां भाई करण और उनका साथी शिवा अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। खबर है कि पूछताछ के दौरान दोनों बच्चे पुलिस को चकमा देकर फरार हो गये। बीते 1 जून को जब दोनों जुड़वां भाई घर से निकले और देर शाम तक वापस नहीं लौटे, तो परिवार की बेचैनी बढ़ने लगी। धुर्वा की गलियों से लेकर रिश्तेदारों के घरों तक उनकी तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार परिजनों ने धुर्वा थाने में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुये रांची पुलिस ने बच्चों का पता बताने वाले के लिये 50 हजार रुपये के नकद इनाम की भी घोषणा कर दी थी।
CCTV ने खोला रहस्य का पहला दरवाजा
रांची पुलिस की स्पेशल टीम लगातार तकनीकी जांच और निगरानी में जुटी हुई थी। शहर के रेलवे स्टेशन और विभिन्न स्थानों के CCTV फुटेज खंगाले गये। जांच के दौरान एक अहम सुराग हाथ लगा। कैमरों में दोनों बच्चे एक ट्रेन में सवार होते दिखाई दिये, जो ओडिशा की ओर जा रही थी। इसके बाद पुलिस को यकीन हो गया कि बच्चे रांची से बाहर निकल चुके हैं। सुराग मिलते ही रांची पुलिस की टीम तत्काल ओडिशा रवाना हुई। पुरी पहुंचकर स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र की मदद ली गई। कई दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस ने करण, अर्जुन और उनके साथी शिवा को ढूंढ निकाला। जब पुलिस ने तीनों बच्चों को सुरक्षित बरामद किया, तब जाकर परिजनों ने राहत की सांस ली। लेकिन इसके बाद जो कहानी सामने आई, उसने हर किसी को हैरान कर दिया।
समंदर देखने का सपना बना घर छोड़ने की वजह
पूछताछ में अर्जुन ने पुलिस को बताया कि उसे, उसके भाई करण और दोस्त शिवा को समुद्र देखने की बेहद इच्छा थी। तीनों ने मिलकर एक गुप्त योजना बनाई और बिना किसी को बताये घर छोड़ दिया। पुरी पहुंचने के बाद बच्चों की दुनिया बदल गई। वे कई दिनों तक समुद्र की लहरों को निहारते रहे, बीच पर घूमते रहे और भगवान जगन्नाथ के मंदिर के आसपास समय बिताते रहे। उनके लिये यह किसी रोमांचक यात्रा जैसा था, लेकिन धीरे-धीरे जेब में रखे पैसे खत्म होने लगे।
पैसे खत्म हुये तो मांगकर खाना पड़ा
कुछ दिनों बाद हालत ऐसी हो गई कि खाने तक के पैसे नहीं बचे। पेट की भूख मिटाने के लिये तीनों बच्चों को मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लोगों से मदद मांगनी पड़ी। यहीं उनकी चतुराई भी सामने आई। पुरी रेलवे स्टेशन पर रेलवे पुलिस को जब ये बच्चे अकेले घूमते दिखे तो उन्हें रोककर पूछताछ की गई। लेकिन बच्चों ने अपनी असली पहचान छिपा ली। उन्होंने खुद को अनाथ और पुरी का स्थानीय निवासी बता दिया। उनकी बातों पर भरोसा कर रेलवे पुलिस ने उन्हें जाने दिया और वे घर लौटने से बच गये।
पूरी तरह फर्जी निकली किडनैपिंग की आशंका
इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि जिस मामले को अब तक अपहरण और किसी बड़ी साजिश से जोड़कर देखा जा रहा था, उसमें ऐसा कुछ नहीं था। बच्चे अपनी मर्जी से घर छोड़कर पुरी घूमने गये थे। हालांकि अब कहानी में नया मोड़ आ गया है। अर्जुन तो पुलिस के पास है, लेकिन करण और शिवा के दोबारा फरार हो जाने के बाद पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। ची पुलिस अब दोनों बच्चों की तलाश में फिर से जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उन्हें भी खोज लिया जायेगा।
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