spot_img
spot_img

संडे स्पेशलः जन्म से मृत्यु तकः डर की डोर से बंधी जिंदगी…

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : सुबह की पहली किरण के साथ जब कोई बच्चा इस दुनिया में आंखें खोलता है, तब शायद उसे नहीं पता होता कि उसकी जिंदगी का सबसे पुराना साथी कौन होगा। वह साथी न कोई दोस्त होता है, न कोई रिश्तेदार और न ही कोई हमसफर। उसका सबसे पुराना और सबसे स्थायी साथी होता है, भय। यह भय कभी मां की डांट बनकर सामने आता है, कभी पिता की कठोर हिदायत बनकर, कभी गुरु की छड़ी बनकर तो कभी कानून की सख्ती बनकर। इंसान का पूरा जीवन मानो एक ऐसे अदृश्य धागे से बंधा होता है, जिसका दूसरा सिरा भय के हाथ में होता है।

भय के सहारे चलती दुनिया, भय के सहारे चलता इंसान

बचपन की गलियों में लौटकर देखें तो हर बच्चा किसी न किसी डर के साथ बड़ा होता है। “यह मत करो.. वहां मत जाओ… ऐसा करोगे तो मार पड़ेगी…” जैसी चेतावनियां उसके चारों ओर एक अदृश्य घेरा खींच देती हैं। वह कई बार अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि सजा के डर से अच्छा बच्चा बनने की कोशिश करता है। स्कूल पहुंचते ही भय का चेहरा बदल जाता है। अब वह शिक्षक की डांट, परीक्षा के परिणाम और असफलता की चिंता का रूप धारण कर लेता है। कई बच्चों के सपने भी इसी डर की भेंट चढ़ जाते हैं। कोई चित्रकार बनना चाहता है, कोई संगीतकार, लेकिन परिवार की अपेक्षाओं और नाराजगी के भय से वह डॉक्टर, इंजीनियर या अफसर बनने की राह पर चल पड़ता है।

जब डर बन जाता है जीवन का संचालक

भय केवल रोकता ही नहीं, कई बार इंसान को बेहतर भी बनाता है। जब कोई बच्चा खेल-खेल में किसी जीव को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे बताया जाता है कि ऐसा करने से पाप लगेगा। यही पाप का भय उसके भीतर दया, करुणा और संवेदना के बीज बोता है। धीरे-धीरे यह डर उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है। धर्म भी कहीं न कहीं भय की इसी मनोभूमि पर खड़ा दिखाई देता है। स्वर्ग की आशा और नरक का भय, मोक्ष की चाह और पाप की आशंका, ये सभी भावनाएं मनुष्य को एक अनुशासन में बांधे रखती हैं। संकट के समय मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और चर्चों में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत देती है कि इंसान जब डरता है, तब वह किसी बड़ी शक्ति का सहारा तलाशता है।

पाप, कानून और समाज: भय की अदृश्य सत्ता

भय का दूसरा चेहरा भी है। यही भय समाज को अराजक होने से बचाता है। सड़क पर हेलमेट पहनने वाला हर व्यक्ति अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक हो, यह जरूरी नहीं। कई बार वह चालान के डर से हेलमेट पहनता है। सीट बेल्ट, ट्रैफिक नियम, टिकट लेकर यात्रा करना, कानून का पालन करना, इन सबके पीछे कहीं न कहीं दंड का भय भी काम करता है। कल्पना कीजिए, यदि अदालतों का डर न हो, जेल का भय न हो, पुलिस का डंडा न हो, तो क्या समाज उतना ही व्यवस्थित रह पायेगा? शायद नहीं। यही कारण है कि शासन और प्रशासन की पूरी संरचना भय और अनुशासन के संतुलन पर टिकी हुई है।

डर से अनुशासन तक की यात्रा

आज के दौर में भय के स्वरूप भी बदल गये हैं। कभी चौक-चौराहों पर खड़े सिपाही डर पैदा करते थे, आज CCTV कैमरे, मोबाइल ट्रैकिंग और डिजिटल निगरानी वही भूमिका निभा रहे हैं। तकनीक ने भय को और अधिक अदृश्य, लेकिन प्रभावशाली बना दिया है। सच तो यह है कि भय मनुष्य का दुश्मन भी है और संरक्षक भी। वह हमें बांधता भी है और बचाता भी। वह हमारी स्वतंत्रता को सीमित भी करता है और समाज को सुरक्षित भी बनाता है। शायद इसी कारण भय को पूरी तरह समाप्त करने की कल्पना भी संभव नहीं है। क्योंकि जिस दिन भय पूरी तरह खत्म हो जायेगा, उसी दिन अनुशासन, व्यवस्था और सामाजिक संतुलन की कई दीवारें भी दरकने लगेंगी। इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि भय होना चाहिये या नहीं। असली प्रश्न यह है कि भय कितना हो और किसलिये हो। क्योंकि जब भय मर्यादा बनता है, तब समाज सुरक्षित रहता है, लेकिन जब भय जीवन पर हावी हो जाता है, तब इंसान जीना भूल जाता है।

 

इसे भी पढ़ें : अकेलेपन की दवा बनी AI गुड़िया, बुजुर्गों की जिंदगी में घोल रही अपनापन…

इसे भी पढ़ें : ई-चालान नहीं भरा तो गाड़ी होगी ब्लैकलिस्ट…

इसे भी पढ़ें : ‘बेटी-बेटी होती है’, अखिलेश की बेटी पर टिप्पणी मामले में योगी ने दर्ज कराई FIR…

इसे भी पढ़ें : युवाओं के लिये UPSC में खुला सरकारी नौकरी का खजाना…

इसे भी पढ़ें : भारतीय सेना को मिला नया नेतृत्व, धीरज सेठ होंगे अगले चीफ…

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

15 जून से इन 4 राशियों का चमकेगा भाग्य…

Kohramlive : आसमान में ग्रहों की चाल बदलने वाली...

ग्रेजुएट युवाओं के लिये SBI, BoB और सेंट्रल बैंक में निकली बंपर वैकेंसी…

Kohramlive : बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने का सपना देख...

अफसर बनने का बेहतरीन मौका, सैलरी डेढ़ लाख तक…

Kohramlive : सेंट्रल नौकरी की चाहत रखने वाले लोगों...

अकेलेपन की दवा बनी AI गुड़िया, बुजुर्गों की जिंदगी में घोल रही अपनापन…

Kohramlive : बढ़ती उम्र के साथ सबसे बड़ी चुनौती...

ई-चालान नहीं भरा तो गाड़ी होगी ब्लैकलिस्ट…

Bihar : बिहार में यातायात नियमों को हल्के में...