Kohramlive : जब जीवन में कठिनाइयां चारों ओर से घेर लें, जब अपने भी साथ छोड़ दें और मन भ्रमित हो जाये, तब श्रीकृष्ण की गीता हमें वह दिव्य दृष्टि देती है, जो हर तूफान में भी शांत और दृढ़ बने रहने की ताकत देती है। गीता कहती है, “कर्म करो, फल की चिंता मत करो।” यही मंत्र हमें हर परिस्थिति में संतुलित, शांत और दृढ़ बनाये रखता है। जब मन डगमगाये, इन उपदेशों को स्मरण करें, हर अंधेरा प्रकाश में बदल जायेगा। गीता के ये 10 उपदेश किसी दीपक की तरह हैं, जो हर परिस्थिति में मार्गदर्शन करते हैं—
1. क्रोध से बचेंः क्रोध भ्रम पैदा करता है, और भ्रम बुद्धि को नष्ट कर देता है। क्रोध को साधना ही आत्मशक्ति का पहला संकेत है।
2. विश्वास ही निर्माण करता हैः मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। जैसा वह सोचता और मानता है, वैसा ही बन जाता है।
3. अपना धर्म सर्वोपरिः सबसे बड़ा धर्म है, अपने स्वधर्म का पालन करना। दूसरों के धर्म का अनुकरण आत्मविनाश का मार्ग है।
4. मन का नियंत्रणः जो व्यक्ति अपने मन को वश में कर लेता है, वही उसका सच्चा मित्र है। बेकाबू मन सबसे बड़ा शत्रु है।
5. समान दृष्टिः ज्ञानवान हर जीव में एक ही आत्मा को देखता है, चाहे वह ब्राह्मण हो या पशु। यही समभाव परमज्ञान है।
6. ज्ञान सबसे बड़ा धनः इस संसार में ज्ञान से बड़ी कोई संपत्ति नहीं और अज्ञानता से बड़ा कोई शत्रु नहीं।
7. साधना का रहस्यः सत्य, धैर्य और समर्पण से ही असली ज्ञान की प्राप्ति संभव है।
8. प्रयास व्यर्थ नहीं जाताः कभी भी अपने प्रयास को व्यर्थ न समझें। हर छोटा कदम भी सफलता की ओर अग्रसर करता है।
9. सच्चा विद्यार्थीः सच्चा विद्यार्थी वही है जो धैर्यवान और जिज्ञासु हो, क्योंकि धैर्य से ही ज्ञान का द्वार खुलता है।
10. अभ्यास ही सफलता हैः निरंतर अभ्यास ही सफलता का सबसे बड़ा रहस्य है। अभ्यास से असंभव भी संभव हो जाता है।
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