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जिसे सहारे की जरूरत थी, वही बन गया लोगों का सहारा…

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Bihar : जिंदगी ने बचपन से ही जिनके हिस्से संघर्ष लिख दिये थे, उन्होंने हार मानने के बजाय दूसरों की जिंदगी में उम्मीद का उजाला भरने का रास्ता चुना। दरभंगा के खराजपुर मोहल्ला में रहनेवाले वैद्यनाथ कुमार सहनी की कहानी केवल संघर्ष की नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और इंसानियत की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है। पोलियो की वजह से दिव्यांग होने के बावजूद वैद्यनाथ ने अपने जीवन का उद्देश्य रक्तदान और जरूरतमंदों की मदद को बना लिया। आज जिले में लोग उन्हें रक्तदाता और संकट की घड़ी में जीवनदाता के रूप में पहचानते हैं।

बचपन में पोलियो, फिर पिता का बिछड़ना

वैद्यनाथ बताते हैं कि महज चार वर्ष की उम्र में पोलियो ने उनके पैरों की रफ्तार छीन ली। इस दर्द से उबर भी नहीं पाये थे कि 10 साल की उम्र में पिता का साया भी सिर से उठ गया।बचपन की इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें जिंदगी की सच्चाइयों से बहुत जल्दी रूबरू करा दिया। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बना लिया। वैद्यनाथ कहते हैं कि पिता की बीमारी के दौरान जब रक्त की जरूरत पड़ी, तभी उन्हें रक्तदान के महत्व का एहसास हुआ। उसी दिन उन्होंने मन में ठान लिया था कि अवसर मिलने पर वे दूसरों की मदद जरूर करेंगे। 18 साल की उम्र में साल 2012 में उन्हें पहली बार रक्तदान करने का अवसर मिला। एक गर्भवती महिला को ऑपरेशन के लिये तीन यूनिट रक्त की जरूरत थी। दो यूनिट उसके परिजनों ने दिया और तीसरी यूनिट वैद्यनाथ ने दान की। यही वह क्षण था, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

रक्तदान को बना लिया जीवन का मिशन

पहली बार रक्तदान करने के बाद वैद्यनाथ कभी पीछे मुड़कर नहीं देखे। समय-समय पर जरूरतमंद मरीजों के लिये रक्तदान करते रहे और देखते ही देखते यह सेवा उनका मिशन बन गई। आज वे 33 बार रक्तदान कर चुके हैं और हर साल दो से अधिक बार रक्तदान करते हैं। रक्तदान के दौरान उन्होंने महसूस किया कि जरूरतमंद मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन रक्तदाता कम हैं। इसी सोच ने उन्हें एक बड़ा कदम उठाने के लिये प्रेरित किया। वर्ष 2022 में उन्होंने ‘युवा शक्ति फाउंडेशन’ की स्थापना की। शुरुआत छोटी थी, लेकिन धीरे-धीरे एक-एक कर सौ से अधिक युवा इस अभियान से जुड़ते चले गये। आज यह टीम 200 से अधिक मरीजों की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा चुकी है।

एक मैसेज और पहुंच जाता है रक्तदाता

वैद्यनाथ ने फाउंडेशन के नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) के ब्लड बैंक सहित शहर के कई निजी ब्लड बैंकों से उनका सीधा संपर्क है। जैसे ही किसी मरीज को रक्त की जरूरत होती है, ब्लड ग्रुप के साथ सूचना ग्रुप में साझा की जाती है। इसके बाद नजदीकी रक्तदाता तुरंत ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान कर देता है। इस व्यवस्था ने कई मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में बड़ी मदद की है। फाउंडेशन से जुड़े रक्तदाता बताते हैं कि जब रक्त मिलने के बाद मरीज और उसके परिवार के चेहरे पर राहत दिखाई देती है, तो उससे बड़ा सुख कोई नहीं होता। वे कहते हैं कि जिन लोगों के लिये रक्तदान करते हैं, उन्हें और उनके परिवार को भी रक्तदान के लिये जागरूक करते हैं ताकि समाज में अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें। वैद्यनाथ की इस निस्वार्थ सेवा को कई सामाजिक संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है। उन्हें डॉ. कलाम विजनरी ऑफ इंडिया अवार्ड-2025, रक्तवीर सम्मान-2024 सहित एक दर्जन से अधिक प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।

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