Kohramlive : दुनिया आज AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की रफ्तार से दौड़ रही है और इस दौड़ का असली ईंधन हैं सेमीकंडक्टर चिप्स। ऐसे में भारत भी अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक चिप निर्माण का बड़ा खिलाड़ी बनने की तैयारी में जुट गया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हालिया संकेतों ने इस उम्मीद को और मजबूत कर दिया है कि आने वाले दिनों में देश में मेमोरी चिप निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनायें धरातल पर उतरीं, तो भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
AI और डेटा सेंटर ने बदल दी बाजार की तस्वीर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के बढ़ते उपयोग ने मेमोरी चिप्स की मांग को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा दिया है। खासकर हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन चिप्स का इस्तेमाल AI सर्वर, सुपरकंप्यूटर, डेटा सेंटर और अत्याधुनिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग सिस्टम में किया जाता है। दुनियाभर में मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन आपूर्ति उसी गति से नहीं बढ़ पा रही। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में मेमोरी चिप्स की अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है।
भारत में डेटा सेंटर निवेश का नया युग
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ भारत में डेटा सेंटर उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश 200 अरब डॉलर से अधिक पहुंच सकता है। डेटा सेंटरों को विशाल स्टोरेज क्षमता और उच्च गुणवत्ता वाली मेमोरी चिप्स की आवश्यकता होती है। ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण भारत के लिए रणनीतिक जरूरत बनता जा रहा है। यही कारण है कि अब देश केवल चिप डिजाइन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि बड़े पैमाने पर निर्माण क्षमता विकसित करने पर भी जोर दे रहा है।
नई फैक्ट्रियों की आहट, बढ़ सकती है उत्पादन क्षमता
वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग को देखते हुये कई कंपनियां नई उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही हैं। कुछ कंपनियों ने हाल ही में नई विनिर्माण सुविधाओं से व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू किया है। अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से कहा कि भारत में भी नये निवेशकों के आने और मौजूदा कंपनियों द्वारा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत दिखाई दे रही हैं। अगर यह प्रक्रिया तेज होती है, तो भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: अब डिजाइन और रिसर्च पर जोर
सरकार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण की तैयारी कर रही है। मिशन 2.0 के तहत चिप डिजाइन, रिसर्च और निर्माण उपकरणों के स्थानीय विकास को प्राथमिकता दी जायेगी। सरकार चाहती है कि वैश्विक कंपनियां भारत में केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि डिजाइन, अनुसंधान और नवाचार गतिविधियां भी शुरू करें। इससे देश में तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम अधिक मजबूत बनेगा।
दशकों पुराना सपना अब हकीकत के करीब
भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा था। कई प्रयासों के बावजूद देश बड़े स्तर पर चिप निर्माण में सफलता हासिल नहीं कर पाया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं, निवेश अनुकूल नीतियों और वैश्विक कंपनियों की बढ़ती रुचि ने तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। अब देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की मजबूत नींव तैयार होती दिखाई दे रही है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निवेश, उत्पादन विस्तार और अनुसंधान गतिविधियां इसी गति से आगे बढ़ती रहीं, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक चिप सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
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