Bihar : चमकी बुखार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी खतरनाक बीमारियों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अब गांव-गांव के लोगों का जगाने का काम शुरू किया है। छपरा के रिविलगंज से लेकर जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक रात में चौपाल सज रही है। कहीं प्रोजेक्टर पर जागरूकता फिल्में दिखाई जा रही हैं तो कहीं हाईटेक प्रचार रथ लोगों को बीमारी से बचाव का संदेश दे रहा है। मकसद सिर्फ एक है, सारण का कोई भी बच्चा चमकी बुखार का शिकार न बने।
जब चौपाल बनी बच्चों की सुरक्षा की पाठशाला
रात्रि चौपालों में बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट रहे हैं। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके जानने में रुचि दिखा रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी सरल भाषा में समझा रहे हैं कि समय पर सावधानी बरतकर इस बीमारी से बच्चों की जान बचाई जा सकती है। यही वजह है कि चौपाल अब गांव की सुरक्षा पाठशाला बन गई है। कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्टर पर विशेष जागरूकता फिल्में दिखाई जा रही हैं। वीडियो के जरिये चमकी बुखार के लक्षण, खतरे और बचाव के उपायों को बेहद आसान तरीके से समझाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि चित्र और वीडियो के माध्यम से मिली जानकारी उन्हें ज्यादा आसानी से समझ में आ रही है।
अभिभावकों को दी गई ‘चमकी की तीन बड़ी चेतावनी’
कार्यक्रम के दौरान वेक्टर बॉर्न डिजीज सुपरवाइजर ने अभिभावकों को तीन महत्वपूर्ण बातें याद रखने की सलाह दी।
- बच्चों को कभी खाली पेट नहीं सुलायें।
- सोने से पहले कुछ मीठा जरूर खिलायें।
- रात में बच्चे की स्थिति पर नजर रखें और सुबह समय पर जगायें।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को तेज बुखार, बेहोशी, शरीर में ऐंठन या असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिये।
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