Kohramlive : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में तीन साल की मासूम बच्ची के यौन शोषण मामले में हरियाणा पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी की कार्यशैली को संवेदनहीन और शर्मनाक बताया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि बच्ची को बार-बार थाने, अस्पताल, कमिटी ऑफिस और कोर्ट में क्यों घुमाया गया, जबकि पुलिस सीधे उसके घर जा सकती थी। कोर्ट ने पाया कि बच्ची का बयान आरोपियों के सामने रिकॉर्ड किया गया, जो पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन है। बच्ची को 30 मिनट तक बंद कमरे में रखा गया, जिससे उसका मानसिक आघात और बढ़ा। सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के सदस्यों को शो-कॉज नोटिस जारी किया और पूछा कि उन्हें हटाया क्यों न जाये।
एसआईटी गठन का फैसला
कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया। टीम में सीनियर महिला IPS अधिकारी होंगी। हरियाणा सरकार को जल्द नोटिफाई करने और गुरुग्राम पुलिस को मामले का सारा रिकॉर्ड एसआईटी को सौंपने का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को 25 मार्च को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश भी दिया।
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