Kohramlive : तपती धरती, झुलसाती हवायें और आसमान की ओर टकटकी लगाये करोड़ों आंखे, देशभर में मानसून का इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मौसम विभाग की ताजा उम्मीदों ने गर्मी से बेहाल लोगों को राहत की एक नई किरण दिखाई है। संकेत हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और जून के तीसरे सप्ताह तक देश के अधिकांश हिस्सों को अपनी बारिश की चादर में समेट सकता है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 25 से 30 जून के बीच मानसून राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में दस्तक दे सकता है।
आंधी-बारिश के बाद बदला मौसम का मिजाज
पिछले दिनों दिल्ली में चली तेज आंधी और हुई बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। गर्मी के बीच मिली इस राहत ने मानसून को लेकर उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगमन और उसकी ताकत को लेकर अभी भी कई प्राकृतिक कारक सक्रिय हैं। एक पर्यावरणविद के मुताबिक अल नीनो सीधे तौर पर यह तय नहीं करता कि मानसून दिल्ली कब पहुंचेगा, लेकिन इसका असर बारिश की तीव्रता और अवधि पर जरूर पड़ सकता है। उनका कहना है कि मानसून समय पर आ भी जाये, तब भी जुलाई और अगस्त में बारिश कमजोर पड़ सकती है। बीच-बीच में लंबे ब्रेक देखने को मिल सकते हैं और उमस भरी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। मौसम विभाग ने 11 जून तक तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवायें चलने की संभावना जताई है। वहीं दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और चंडीगढ़ समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश के संकेत हैं। आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
कहीं राहत की बारिश, तो कहीं लू का कहर
मौसम विभाग के अनुसार 9 जून को आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के यनम क्षेत्र में भीषण लू की स्थिति बन सकती है। ओडिशा में गर्म और उमस भरा मौसम लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गोवा के कुछ इलाकों में भी 11 जून तक ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास समुद्री परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। मौसम विभाग ने मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। 12 जून तक श्रीलंका तट, दक्षिण बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के कई हिस्सों में 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवायें चल सकती हैं, जो झोंकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।
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