Simdega : सड़क हादसे में बेटे को खोने का दर्द शायद कभी कम नहीं होता, लेकिन न्याय की राह पर मिला एक फैसला पीड़ित परिवार को कुछ सुकून जरूर दे सकता है। सिमडेगा की मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण (एमएसीटी) की अदालत ने 13 साल के छात्र की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के मामले में उसके माता-पिता के पक्ष में 29 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश सुनाया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण के न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा की अदालत ने संबंधित बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर पूरी मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाये।
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के आधार पर तय हुई मुआवजा राशि
सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और दिशा-निर्देशों का जिक्र करते हुये महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि किसी नाबालिग छात्र की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के मामलों में मुआवजा केवल अनुमान या सामान्य आधार पर तय नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में मृतक की संभावित आय का आकलन सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया जाना चाहिये। इसी सिद्धांत को अपनाते हुये अदालत ने विस्तृत गणना के बाद 29 लाख रुपये मुआवजा निर्धारित किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने अपने आदेश में अदालत ने कहा कि कम उम्र में किसी संतान को खो देना किसी भी परिवार के लिये केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि गहरा मानसिक और भावनात्मक आघात होता है।ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार को न्यायसंगत और उचित मुआवजा मिलना आवश्यक है, ताकि उन्हें कठिन समय में कुछ हद तक राहत मिल सके। यह मामला वर्ष 2024 में हुई सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें 13 साल के छात्र की मौत हो गई थी। इस मामले की एक खास बात यह भी रही कि गवाही शुरू होने के महज तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर अदालत ने अंतिम फैसला सुना दिया।
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