कोहराम लाइव डेस्क: इंडियन सोसाइटी में जीवन में सभी कामों के लिए एक आदर्श उम्र का कंसेप्ट रखा गया है। कानूनी तौर पर तो बालिग लड़कों और लड़कियों की शादी की उ्रम्र तो निर्धारित है ही। आदर्श उम्र 25 बताई जाती है। इसके बावजूद सब कुछ समय से नहीं होता है। आज के समय में महिलाएं शादी से पहले अपना Career बनाना चाहती हैं, ताकि फाइनेंशियल रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। लेकिन, करियर बनाने के साथ ही उनकी शादी की सही उम्र भी बीत जाती है और फिर वे शादी का फैसला लेते समय 30 वर्ष की उम्र में प्रवेश कर जाती हैं। 30 की उम्र के बाद शादी करने के बाद बेबी प्लानिंग में भी समय लग जाता है।
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चिंता की बात नहीं
ऐसे में घर के बुजुर्ग भी उनके लिए चिंतित होने लगते हैं कि 35 के बाद बच्चे पैदा करने में कहीं कोई गड़बड़ न हो जाए, क्योंकि इस उम्र के बाद महिलाओं के लिए बच्चे की प्लानिंग करना जोखिम उठाने जैसा ही है। लेकिन ऐसा नहीं है, कई विशेषज्ञों की माने तो महिलाएं 35 की उम्र के बाद बिना किसी चिंता के बच्चे की प्लानिंग कर सकती हैं, लेकिन इस समय उन्हें कई खास बातों का ख्याल रखना जरूरी है।
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कैफिनयुक्त पदार्थों का कम करें सेवन
यदि गर्भधारण का सोच रही हैं तो चाय-कॉफी जैसे सभी कैफीनयुक्त पदार्थ लेना कम कर दें, क्योंकि कैफीन के ज्यादा सेवन से गर्भपात होने का खतरा होता है। गर्भपात का अधिकतर खतरा 35 की उम्र के बाद ज्यादा होता है।
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नियंत्रित रखें वजन
वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है क्योंकि असंतुलित वजन होने पर हार्मोन्स पर भी प्रभाव पड़ता है, जिससे ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। यह स्थिति अत्यधिक वजन बढ़ने और कम होने दोनों में ही हो सकती है।
यदि 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण करने का सोच रही हैं तो अपने गाइकोनोलॉजिस्ट से इस विषय पर जानकारी लेती रहें कि उनका ओव्यूलेशन पीरियड कब शुरू होगा और यही वह समय होता है जब महिला गर्भधारण कर सकती हैं।
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करें नियमित व्यायाम
यदि नियमित रूप से आहार में प्रोटीन, विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करते हैं तो इससे शरीर का सिस्टम सुधरेगा और साथ नियमित रूप से व्यायाम करने से भी स्वास्थ्य बेहतर होगा।स्वास्थ्य के बेहतर होने के साथ ही प्रजनन क्षमता भी बढ़ेगी।
कई रिसर्च से पता चला है कि धूम्रपान और शराब जैसी चीजों के कारण प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। निकोटिन अंडाशय और गर्भाशय को हानि पहुंचाते हैं. इससे अंडाणुओं की गुणवत्ता भी खराब होती है, जिससे प्रजनन क्षमता कम हो जाती है।
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