रांची (रूपम/धीरज) : सड़क पर जान बचाने के लिए बेहताशा भाग रहा था सोनू। उसका खून करने पर आमादा कुछ शख्स दौड़ा रहे थे उसे। ज्यादातर के हाथों में थी तलवार। तब लोग वहां से आ-जा रहे थे। भागता सोनू चीख रहा था- कोई तो बचाओ इन जालिमों से। सुनी सबने, पर बचाने कोई सामने नहीं आया। रोड पर किसी की चीख चित्कार सुन जब 65 साल के अशर्फी सिंह बाहर निकले, जो कुछ देखा, अवाक रह गये। चीखने वाला कोई गैर नहीं, उनका अपना बेटा सोनू था। पैरों पर गिर पड़े लाचार बाप और बेटा की जान बख्श देने की करने लगे गुहार। तरस किसी को नहीं आया।
इसे भी पढ़ें :बिस्किट दिलाने के बहाने 4 साल की बच्ची को ले गया चाचा …और किया ये गंदा काम
जालिमों ने पहले बाप को लाठी से बुरी तरह से पीटकर अधमरा कर दिया और फिर उनकी आंखों के सामने ही सोनू को काट डाला। सोनू का परिवार गुजरे 88 दिनों में भी यह नहीं जाना पाया कि आखिर सोनू का कसूर क्या था। वहीं पुलिस भी कुछ जान नहीं सकी है अबतक। केवल शंका जताती है कि अपने नाम का खौफ पैदा करने की चाह में यह अपराध किया विनोद कुमार सिंह और उसके गुर्गे ने। वहीं सोनू की बेवा कुसुम रोज जीती और मरती है। कुसुम बताती है कि ऐसा कोई दिन नहीं गुजरा जब उसे केस उठा लेने की धमकी नहीं दी जाती। हत्यारे खुलेआम उसे धमकाते हैं कि पति को बीच सड़क पर काट डाला, क्या बिगड़ा मेरा। अगर केस नहीं उठाई तो तेरा भी राम नाम सत्य। सोच लो, तेरा और तेरे बच्चों की जीने की कीमत है केवल तेरा एक सिग्नेचर।
दिल दहला देने वाली यह वारदात 28 अगस्त 2020 को नामकुम थाना क्षेत्र में यश धर्मकांटा के पास हुई थी। इस संबंध में बडे भाई राजू राय ने नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दर्ज प्राथमिकी में विनोद सिंह, देवानंद सिंह, राजू सिंह, कैलाश सिंह, दीपक सिंह, राहुल सिंह, रवीन्दऱ सिंह, रोहन सिंह और वीर यादव नामजद अभियुक्त बनाये गये हैं। इनमें केवल कैलाश सिंह और दीपक सिंह को जेल भेजा गया है। बाकी अभियुक्त अभी भी छुट्टा घूम रहे हैं। पुलिस की नजरों में सब फरार हैं।
पुलिस ने मुख्य अभियुक्त विनोद सिंह के घर में 25 अक्तूबर को इश्तेहार चिपकाया है। पुलिस बताती है कि अगर विनोद सिंह सरेंडर नहीं करता है, तो उसके घर को कुर्क किया जायेगा।
इसे भी पढ़ें :Highspeed बस पेड़ से टकराई, सात यात्री घायल
इधर मुख्य अभियुक्त विनोद सिंह की पत्नी रूपाली सिंह ने सोनू की हत्या में अपने पति के शामिल होने से साफ इनकार किया है। उसका कहना है कि उसके पति को इस मामले में फंसाया जा रहा है। जिस दिन घटना घटी थी, उस दिन तो उसके पति यहां थे ही नहीं।
लुट गई दुनिया, न कोई दुश्मनी, न कोई रंजिश, सूनी हो गयी मांग। बच्चे हुए अनाथ। अब सवाल उठता है कि कौन देखेगा इन्हें और कैसे मिलेगा इंसाफ?
इसे भी पढ़ें : लालू को जमानत नहीं, 11 December तक करना होगा इंतजार











