कोहराम लाइव डेस्क : आम जनता से लेकर इंडस्ट्री चैंबर तक इस बार यह मांग कर रहे हैं कि होम लोन पर मिलने वाले टैक्स छूट की सीमा को और बढ़ाया जाए। जानकारों का कहना है कि होम लोन पर ब्याज में राहत बढ़ाकर कम से कम 5 लाख रुपये कर देनी चाहिए। पहले से ही मंदी की मार झेल रहे रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कोरोना ने बिल्कुल कमर तोड़कर रख दी है। इस सेक्टर को अब बजट से ही कुछ संजीवनी मिलने की आस है।
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सालाना 3 से 4 लाख चले जाते हैं ईएमआई में
गौरतलब है कि किसी मेट्रो शहर में टू बीएचके फ्लैट पर किसी व्यक्ति के सालाना आराम से 3 से 4 लाख रुपये ईएमआई में चले जाते हैं। इंडस्ट्री चैंबर फिक्की ने तो ब्याज वाले हिस्से की छूट सीमा 2 से बढ़ाकर 10 लाख तक करने की मांग की है। इससे इस संकट के दौर में रियल एस्टेट कारोबार में कुछ जान फूंकी जा सकती है।
अभी कितनी है छूट
अभी करीब 5 लाख रुपये के भुगतान पर टैक्स मिलती है छूट
- इनकम टैक्स की धारा 80 सी के तहत करीब 5 लाख रुपये तक के लोन मूलधन पुनर्भुगतान राशि पर टैक्स छूट।
- धारा 24 बी के तहत होम लोन के ब्याज पर सालाना2 लाख रुपये तक की रकम पर टैक्स छूट।
- धारा 80EEA के तहत 45 लाख रुपये तक के मकान पर 5 लाख रुपये की होम लोन के ब्याज अदायगी पर अतिरिक्त छूट।
- सेक्शन 80EE के तहत पहली बार घर खरीदने वालों के लिए होम लोन की ब्याज पर 50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट।
गौरतलब है कि जो लोग 80EE का लाभ ले रहे हैं उन्हें 80EEA का लाभ नहीं मिलता.
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इंडस्ट्री की क्या है मेन डिमांड
रियल एस्टेट से जुड़े संगठनों का कहना है कि बजट में अगर लोगों को होम लोन पर छूट, ब्याज सब्सिडी, जीएसटी कटौती, रियल एस्टेट को इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का दर्जा देने जैसे कदम उठाए गए तो यह पूरे समूचे हाउसिंग सेक्टर में तेजी लाने वाले कदम साबित हो सकते हैं. फिक्की ने भी यह मांग की है कि होम लोन पर मिलने वाले ब्याज सब्सिडी को आगे बढ़ाया जाए।
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