Ranchi : सरेंडर नीति झारखंड में उग्रवाद को प्रोत्साहित करने वाला है। संगीन जुर्म करने वाले उग्रवादियों को घर-द्वार जमीन देकर उन्हें बसाना संविधान का अपमान है। जो कोई परिवार के सदस्य को उग्रवादियों ने मारा, उजाड़ा या फिर बर्बाद कर डाला, वो परिवार कभी इस नीति का सपोर्ट नहीं करती। दुखी परिवार इस सरेंडर पॉलिसी से आहत और मर्माहत हैं। यह कहना है राजद के वरीय नेता मुस्तफा अंसारी का।
समाजसेवी मुस्तफा ने कहा कि डर-भय के कारण कोई गवाही तक देने कोर्ट में नहीं जाते, जिसके कारण खूंखार नक्सली और उग्रवादी कोर्ट से बाइज्जत बरी हो जा रहे हैं। मुस्तफा ने कहा कि झारखंड में युवा बेरोजगारों की लंबी फौज है। सरकार की सरेंडर पॉलिसी को ये युवा बेरोजगार बहुत करीब से देख रहे हैं, जिनसे उनका मन भी बदलने लगा है। बेरोजगार युवक-युवती इस सोच में जकड़ते जा रहे हैं कि मारो दो-चार को, जलाओ सरकारी संपत्ति फिर सिर पर ईनाम घोषित होते ही सरेंडर पॉलिसी के तहत हथियार डाल लाभे-लाभ कमाओ। मुस्तफा अंसारी ने कहा कि इसी सोच का नतीजा है कि झारखंड अलग होने के बाद यहां उग्रवाद और अपराध बढ़ा।
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