UP : कानपुर देहात के साढ़ इलाके के लक्ष्मणखेड़ा गांव में जब सूरज की पहली किरणें धरती को छूने लगीं, तभी गांव की एक गली से एक दिल दहला देने वाली चीख गूंजी, “उठो धीरू…। उठो…” चारपाई पर खून में लथपथ पड़े धीरेंद्र पासी को देख गांव सहम गया। धीरेंद्र की हत्या की गुत्थी जब पुलिस ने सुलझाई, तो पीछे छिपा था एक ऐसा अफसाना, जो गांव की गलियों में अब फुसफुसाहट बन चुका है। धीरेंद्र की पत्नी रीना और उसका भतीजा सतीश, जो खून के रिश्ते में जेठ का बेटा था, प्यार की अंधी गलियों में इतना आगे बढ़ चुके थे कि राह का कांटा बन चुके पति को मौत की नींद सुला दिया। धीरेंद्र जब घर में CCTV लगाने की बात करने लगा, तो रीना को डर सताने लगा। वो गेहूं बेचकर बीस हजार जमा कर चुका था। बस… इसी डर ने उसे एक खौफनाक प्लान की ओर ढकेल दिया। 10 मई की रात को धीरेंद्र की सब्जी में रीना ने नींद की गोलियां मिला दीं। फिर गर्मी का बहाना बना चारपाई आंगन में डाल दी। पति जब बेसुध हो गया, तो सतीश को बुलाया। बाथरूम की छत से एक भारी लकड़ी का गुटका उतार लाये और सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिया, धीरू अब खामोश था, हमेशा के लिये। इसके बाद सतीश ने गुटके को धोया, आंगन में खून फैल गया। फिर दोनों ने आंगन और बाथरूम को साफ किया। रात को ही नहाये, ताकि कोई सबूत न बचे। सुबह जब गांव की भीड़ जुटी, तो सतीश ने मासूमियत की चादर ओढ़ ली, चारपाई पर ‘बेहोश’ होने का नाटक किया।
प्रेम की कॉल डिटेल ने खोला राज
रीना और सतीश एक दिन में 60 से 100 कॉल करते थे। सतीश ने अपने नाम से दो सिम ली थीं, एक रीना के लिये। उस रात भी, वारदात के वक्त तक दोनों संपर्क में थे। एक महीने पहले ही हत्या होनी थी, लेकिन किस्मत ने धीरेंद्र की जान बचा ली थी। उस रात सतीश का भाई छत से गिर गया, और हत्या टल गई। अबकी बार कोई रुकावट नहीं आई। साढ़ पुलिस ने 19 मई की सुबह रीना और सतीश को दबोच लिया। पुलिस के मुताबिक शुरुआत से ही शक घर के अंदर वालों पर था। फॉरेंसिक, कॉल डिटेल, और मां की चुप्पी, हर सुराग रीना और सतीश तक ले गया। इस वारदात के बाद जितनी जुबां उतनी तरह की बातें हो रही है। कुछ लोगों का कहना था कि जिसने सात जन्मों का वादा किया, उसी ने लकड़ी से कूच डाला, अब भरोसा किसपे करें?
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