रोचक है उग्रवादी मसीह चरण पूर्ति की कहानी, बदल डाला मन आईपीएस सुधीर झा
रांची (राजेश/रुपम) : कभी जिसका नाम सुन कांप उठते थे लोग, अब वही बड़का उग्रवादी करेगा होम डिलीवरी खाना। ढाबा खोलने हो चुकी है पूरी तैयारी। बहुत जल्द कटेगा फ़ीता। 12 साल खूंटी जेल में बिताने के बाद बाहर निकला इस बड़का का नाम है मसीह चरण पूर्ति। दिन रात खून खराबा, गोली, बम, बारूद और पर्चा लिखने और भेजने में माहिर पूर्ति का मन पूरी तरह से बदल गया है, इसे बदल डाला एक आइपीएस सुधीर कुमार झा ने। सुधीर झा अभी जैप में आईजी है। दरअसल कॉलेज छात्र मसीह चरण पूर्ति बनना चाहता था बीडीओ लेकिन बन गया बीहड़ का बड़का उग्रवादी। आइए जानते हैं कैसे बदला उसका मन और जुड़ गया समाज के मुख्य धारा से।
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पढ़ाई के दौरान ही नक्सलियों के संपर्क में आया। पढ़ने-लिखने में रुचि थी, सो परचा-पोस्टर लिखने लगा। उसकी कलम आग उगलती थी। वह लोगों की सोच बदलने वाले शब्दों से खेलता था और जब उसकी कलम से निकली तहरीर शोला बन जाती थी, तो लोगों की दहशत और सिहरन से उसके सीने में ठंडक पहुंचती थी। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि नक्सली संगठन जेएलटी (वर्तमान में पीएलएफआई) में शामिल हो गया। उसका आतंक ऐसा हुआ कि गांव तो छोड़िए, आसपास के बड़े इलाके में लोग उसके नाम से कांपते थे। बीहड़ों में रात बिताना उसका शगल था। यह उग्रवादी था मसीह चरण पूर्ति। 2007 में 9 अगस्त को बिहार शरीफ के नवादा धवैया पुल के पास से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, मगर गिरफ्तारी खूंटी दिखाई, 11 अगस्त को उसे जेल भेजा गया। 12 साल जेल में बिताने के बाद 1 जून 2019 को वह जेल से निकला और अब जिंदगी की दूसरी पारी की शुरुआत करेगा ढाबा खोल कर। तैयारी तो होम डिलीवरी तक की है। चीते सी फूर्ति और तेज दिमाग का वह शातिर उग्रवादी, जिसने दशकों तक इलाके में कोहराम मचाया, उसके मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा आईजी सुधीर कुमार झा हैं, जिन्होंने चाईबासा में एसपी रहने के दौरान कई बार उसे रिमांड पर लेकर उसका मन बदलने की कोशिश की। सुनिए मसीह के मुख्यधारा में लौटने की कहानी उसी की जुबानी।
जब तक सेहत, जब तक संगठन में पूछ
मसीह का कहना है कि संगठन में तभी तक लोगों की पूछ होती है, जबतक सेहत है। बीमार पड़ने का मतलब है जिलल्हो्त, जलालत और तिरस्ने्कार। उसने कहा एक बार जब वह बीमार पड़ा तो उसे देखने वाला कोई नहीं था। संगठन भी इलाज कराने में टाल मटोल करने लगा। इसके बाद कुछ साथियों की मदद से बीहड़ से बाहर निकल चोरी छिपे दस महीने तक इलाज कराया। संगठन के साथी पीछे पड़ गये। एक तरफ कुंआ और दूसरी तरफ खाई।
आर्मी के भगोड़े को संगठन में दी जाती है तवज्जो
मसीह ने अपनी जिंदगी के कई मोड़ का खुलासा किया है। उसका कहना है कि पांच विधानसभा क्षेत्र खूंटी, तोरपा, तमाड़, खिजरी, चक्रधरपुर के एमएलए तय करते थे उग्रवादी। जिसपर संगठन का हाथ, वह बन जाता था एमएलए। संगठन में एनसीसी कैडेट्स और आर्मी के भगोड़े को तवज्जो दी जाती है, क्योंकि उनको ट्रेनिंग नहीं देनी पड़ती है। आइपीएस अधिकारी सुधीर कुमार झा से प्रभावित मसीह का कहना है कि उन्होंने मेरे मन को बदलकर रख दिया। वे जिंदगी का सच्चा नजरिया बताते थे। वे तथ्यों को लेकर चलने वाले अधिकारी हैं। उनकी बातों में सच्चाई होती है, जिसने मुझे काफी प्रभावित किया और मैंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आज उन्हीं की वजह से मैं सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा हूं। उन्होंने मेरे ऊपर लगे सभी झूठे मुकदमों को हटवाया। मैं जहां भी रहूंगा उनका नाम जरूर लूंगा।
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