‘आका’ के ठंडा पड़ते ही किया सरेंडर
रांची : लोकेश चौधरी ने ऐसे ही थोड़े सरेंडर किया होगा। उसने तो पूरी प्लानिंग की होगी। हमलोग तो अब टूट चुके हैं। अब अचानक से पूरा वाकया पलट गया है। यह कहना है शेखर अग्रवाल का, जो मारे गए हेमंत और महेंद्र अग्रवाल के बड़े भाई हैं। याद दिला दें कि दोनों भाई की हत्या 06 मार्च 2019 को हुई थी। उनके शव राजधानी रांची के अशोक नगर के एक निजी चैनल साधना न्यूज के ऑफिस में मिले थे। अब घटना के 644 दिन बाद नौ दिसंबर को मुख्य आरोपी लोकेश चौधरी ने अचानक कोर्ट पहुंचकर सरेंडर किया। सूत्रों के अनुसार उसके एक ‘आका’ के ठंडा पड़ते ही उसने सरेंडर कर लिया।
लोकेश ने कुछ नहीं किया था, तो भागा क्यों
शेखर अग्रवाल और उनका पूरा परिवार छह मार्च 2019 के उस मनहूस दिन को नहीं भूल पाते, जिस दिन उनके घर की खुशियों को किसी ने छीन लिया। मुख्य आरोपी लोकेश ने सरेंडर के बाद कहा कि उसे मामले में फंसाया जा रहा है। इस पर शेखर अग्रवाल कहते हैं कि अगर उसने कुछ नहीं किया, तो वह फरार क्यों रहा इतने दिनों तक। निर्दोष होता तो भागता ही नहीं। अब वापस आया है, तो कोई न कोई ग्राउंड बनाकर ही आया होगा। कुछ भी हो सकता है, कैसे बता सकते हैं। वह कह रहा है कि वह वहां नहीं था, लेकिन उसके कॉल डिटेल्स तो बता रहे हैं कि उस समय वह घटनास्थल पर ही मौजूद था। यह डिटेल तो एफआईआर में भी है। घटना के बाद वह वहां से फरार क्यों हुआ। अगर आपके सामने कोई घटना होती है और आप उसमें निर्दोष हैं, तो आप भागे क्यों? आप उसी समय सरेंडर करते और पुलिस को बताते कि हम कुछ नहीं किए हैं।
साक्ष्य क्या पलटता है, क्या पता, क्या होगा
लोकेश के दूसरे आरोपी एमके सिंह को पहचानने से इनकार करने की बात पूछने पर शेखर अग्रवाल ने कहा कि वह तो अब किसी को नहीं पहचानेगा। वह तो अब उस ऑफिस को भी नहीं पहचानेगा। फिर कहेगा कि मेरा मोबाइल चोरी हो गया था। जबकि हमलोग हत्या के एक दिन पहले उसी मोबाइल पर उससे बात किए थे। मेरे भाइयों से भी सौ से ज्यादा बार उसी फोन से उसकी बात हुई थी। एमके सिंह से भी बात की थी। अभी वो कुछ भी बोलेगा। कानून को ही आंखें खोलकर सबकुछ देखना-समझना होगा अब तो। अभी हम कुछ बोलेंगे, वो भी कुछ बोलेगा, और साक्ष्य क्या पलटता है, क्या पता, क्या होगा। फिल्म में आजकल सबकुछ सिखा देता है। वह आज आया है तो ऐसे थोड़े आया होगा, पूरी प्लानिंग से आया होगा।
भाइयों के बच्चे पूछते हैं, पापा कब आएंगे…
शेखर अग्रवाल धनबाद में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं। हेमंत और महेंद्र दोनों उनसे छोटे थे। उनके भाइयों का परिवार एकदम टूट गया है। छोटे भाई की शादी के एक साल ही हुए थे। लेकिन मंझले भाई के दो बच्चे हैं। एक तीन साल और एक पांच साल का। दोनों हमेशा पूछते हैं कि पापा कब आएंगे। हम उनसे कहते हैं, जब कोरोना खत्म हो जाएगा, तब आएंगे पापा। उन्हें कुछ नहीं बता पाते। दोनों भाई की पत्नी का तो जैसे संसार ही खत्म हो गया है।
FIR में क्या लगा था आरोप, पढ़िये हूबहू


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