spot_img

महावीर जयंती : ”जरूरत से ज्यादा संग्रह दुखों से मुक्ति नहीं दिलाता”

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : पूरी दुनिया को सत्य और अहिंसा का सही राह दिखाने वाले भगवान महावीर का जन्म दिन 4 अप्रैल को है। जैन धर्म की स्थापना और उसके प्रचार में अहम भूमिका निभाने वाले महावीर जयंती को जैन समाज द्वारा भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव को जैन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार माना गया है। जैनी इसे पूरी आस्था के साथ मनाते हैं। भगवान महावीर को वर्धमान के नाम से भी जाना जाता है। वर्धमान का तात्पर्य है “जो बढ़ता है”,। वहीं उन्हें वीर, अतिवीर और सहमति के नाम भी जाना जाता है।

जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर महावीर स्वामी का जन्म बिहार कुंड ग्राम में हुआ था। करीब ढाई हजार साल पहले अर्थात ईसा से 599 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के क्षत्रिय कुंडलपुर में राजा सिद्धार्थ और उनकी पत्नी रानी त्रिशला के गर्भ से जन्मे भगवान महावीर का जन्म उस युग में हुआ था जिस वक्त हिंसा, पशु बलि, जातिगत भेदभाव जोरों पर था। उन्होंने 30 साल के उमर में सांसारिक मोह-माया और राज वैभव का त्याग कर दिया था। उन्होंने संन्यास ले लिया था। ऐसा भी माना जाता है कि 12 साल की कठोर तपस्या के बाद भगवान महावीर को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उन्हें 72 वर्ष की आयु में पावापुरी में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। महावीर जयंती पर जैन धर्म का अनुसरण करने वाले इस दिन लोग भगवान महावीर की प्रतिमा को जल और सुगंधित तेलों से स्नान कराते हैं। इन्हे भगवान महावीर की शुद्धता का प्रतीक माना गया है। जैन धर्म के लोगों द्वारा भगवान महावीर की प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दौरान जैन भिक्षु द्वारा रथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा को शहर की परिक्रमा कराने का विधान हैं। इस तरह भगवान महावीर द्वारा बताये गए जीवन के सार को लोगों तक पहुँचाते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भगवान महावीर द्वारा पंचशील सिद्धांत के बारे में बताया गया है, जो किसी भी मनुष्य को सुख तथा समृद्धि से युक्त जीवन की तरफ ले जाता है। जानें इस पंचशील सिद्धांत के बारे में

अहिंसा: भगवान महावीर ने कहा था कि, प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन से हिंसा का त्याग कर देना चाहिये। सभी मनुष्य और जीव-जंतु के प्रति समानता और प्रेम का भाव रखें।

सत्य: भगवान महावीर का कहना था कि, हर मनुष्य को सत्य के पथ का अनुसरण करना चाहिए, किसी भी स्थिति में झूठ बोलने से बचना चाहिये।

अपरिग्रह: अपरिग्रह के विषय में भगवान महावीर ने कहा था कि किसी भी मनुष्य को जरूरत से ज्यादा वस्तुओं का संग्रह करने से बचना चाहिये। ऐसा कर मनुष्य कभी भी अपने दुखों से मुक्त नहीं हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को सुख और शांतिमय जीवनयापन करने के लिए जरूरत भर ही वस्तुओं का संचय करना चाहिये।

अस्तेय: भगवान महावीर का चौथा सिद्धांत है अस्तेय। अपने जीवन में अस्तेय का पालन करने वाला मनुष्य हर कार्य को सदैव संयम से करता है। अस्तेय का अर्थ होता है चोरी नहीं करना, लेकिन यहाँ चोरी का अर्थ सिर्फ भौतिक चीजों की चोरी करने से नहीं अपितु दूसरों के प्रति बुरी दृष्टि से भी है, जिससे सभी मनुष्यों को बचना चाहिये। शांतिपूर्ण जीवन की प्राप्ति के लिए हमें अस्तेय का पालन करना चाहिए क्योकि अस्तेय का पालन करने से ही हमें मन की शांति की प्राप्ति होती है।

ब्रह्मचर्य: ब्रह्मचर्य के बारे में भी भगवान महावीर ने अत्यंत अनमोल उपदेश दिए हैं। उन्होंने ब्रह्मचर्य को उत्तम तपस्या बताया है। ब्रह्मचर्य मोह-माया छोड़कर अपने आत्मा में लीन हो जाने की प्रक्रिया है। ब्रह्मचर्य का पालन करने से मन की शांति और सुकून की प्राप्ति होती है।

इसे भी पढ़ें : झारखंड के इस जिले में किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, देखें…

इसे भी पढ़ें : राज्य में उद्योग लगेंगे तो मिलेगा रोजगार : सीएम हेमंत

इसे भी पढ़ें : बड़े भाई को का*ट डाला, वजह हैरान करने वाली… देखें

इसे भी पढ़ें : कागज के एक टुकड़े से खुल गया भयानक राज… देखें क्या

इसे भी पढ़ें : बेटी को जन्म देना हो गया गुनाह, क्या हुआ भारती का हाल… देखें

इसे भी पढ़ें : बच्चे में यह लक्षण देखें तो माई-बाप अलर्ट हो जाये : डॉ वर्मा

इसे भी पढ़ें : बेवा भाभी और दो बच्चों के क*त्ल का खुला राज, क्या बता गये SDPO… देखें

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles: