Ranchi : 52 रोज हो गये थे। बिटिया रेश्मी का कुछ भी क्लू नहीं मिला था। नाते-रिश्तेदार उसे खोज-खोज कर थक-हार चुके थे। घरवाले को लगा कि अगर रूठ कर सहेली के घर जाती तो अबतक लौट आती। कोई सहेली इतना दिन तक कैसे किसी को अपने पास रख सकती है। तरह-तरह की बातें घरवालों के मन में उमड़ती-घुमड़ती रही। अनहोनी हो जाने से अनजान घरवाले पूरा टेंशन में थे। अचानक एक रिश्तेदार ने रेश्मी की कॉपी-किताब के पन्ने उलटने शुरू कर दिये।
कॉपी में मिला कागज का एक टुकड़ा, खोल गया बड़ा राज
एक किताब के अंदर कागज का एक टुकड़ा मिला। इस टुकड़े पर इस रिश्तेदार की नजर अटक गई। उस कागज के टुकड़े से यह राज खुला कि रेश्मी ने अपना ऑब्सरन कराया था। घरवाले भागे-भागे एक बार फिर चुटिया थाना पहुंचे। पुलिस तुरंत उस नर्सिंग होम में पहुंची जहां उसका गर्भपात किया गया था। रजिस्टर चेक करने पर उसमें एक ऐसा नाम सामने आया जो पुलिस के लिए नया नहीं था, लेकिन बेहद चौंकाने वाला था, उस रजिस्टर में पंकज महतो का नाम लिखा हुआ था।
पंकज ने मुंह खोला तो दंग रह गई पुलिस
युवती के पति के रूप में पंकज ने अपना नाम गर्भपात के समय नर्सिग होम में दर्ज करवाया था। रेश्मी के गायब हो जाने के बाद भी घरवालों ने पंकज पर शंका जताई थी। तब पुलिस ने पंकज को थाने में बुला कर उसकी क्लास ली थी। उस समय पंकज ऐसा नाटक किया कि मानो उसे कुछ पता ही नहीं, उसकी रेश्मी कहां है। उसने यह जरूर कबूल किया कि दोनों में अच्छी दोस्ती है, पर वह अभी कहां, इस बारे में उसे कुछ भी पता नहीं। जैसे ही पंकज के सामने कागज के उस टुकड़े को रखा गया, वह टूट गया। उसने पुलिस के सामने सब राज उगल दिये।
बचपन का प्यार थी रेशमी
इस कांड का अनुसंधान खुद चुटिया के थानेदार वेकेंटश कुमार कर रहे हैं। पंकज ने उन्हें बताया कि रेश्मी मुंडा उसका बचपन का प्यार थी। दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे। जमाने से खुद को छुपा उनका मिलना-जुलना भी होते रहता था। दोनों इतने करीब आ गये थे कि रेश्मी को ऑब्सरन तक कराना पड़ा। पंकज ने थानेदार वेकेंटश कुमार को बताया कि रेश्मी बीते 7 फरवरी को उसके पास आई थी। वह उसके साथ ही रहने की जिद में अड़ गई थी। रेश्मी यह कहने लगी कि अब उसके बिना रहा नहीं जाता। अब वो उसके साथ ही रहेगी। तब पंकज ने उसे खूब समझा-बुझा और प्यार का वास्ता देकर उसे वापस उसके घर भेज दिया। इसके बाद फिर बीते 13 फरवरी को रेश्मी भागे-भागे पंकज के पास आ गई।
साथ रहने की जिद पर अड़ गई वो
इस बार पूरी जिद में अड़ गई कि चाहे जो हो जाये अब वो अपने घर नहीं जाने वाली। थानेदार वेकेंटश कुमार ने खुलासा किया कि उस रात रेश्मी अपने प्रेमी पंकज के घर में ही रूक गई। दोनों में किसी बात को लेकर खूब झगड़ा हुआ। पंकज किसी भी हालत में रेश्मी को साथ रखने को तैयार नहीं था। पंकज का कहना है कि उस रात दोनों अलग-अलग कमरे में सोये। सुबह देखा कि रेश्मी फांसी के फंदे पर लटक गई है। वह डर गया। इसके बाद रेश्मी के डेड बॉडी को एक बोरे में बंद कर ओरमांंझी के उकरीद पहाड़ पर चला गया। वहां उसके बदन पर पेट्रोल छिड़ककर माचिस मार दी। वो पूरी तरह से जल गई। ऐसा करने के बाद पंकज अपने घर लौट आया।
27 फरवरी को मिला कंकाल
बीते 27 फरवरी को ओरमांझी पुलिस ने उकरीद पहाड़ से एक कंकाल बरामद की थी, तब पुलिस को कुछ भी पता नहीं चला। पुलिस को कंकाल को रिम्स में भेज दिया, ताकि यह पता चल सके कि कंकाल मेल का है या फिमेल का। बाकी कहानी मिले कंकाल बयां कर रही थी। चुटिया पुलिस गायब रेश्मी को खोज निकालने में परेशान थी, वहीं ओरमांझी पुलिस मिले कंकाल को लेकर। एक कागज के टुकड़े से इस ब्लाइंड मर्डर केस के पीछे छुपे सारे राज खुलकर सामने आ गये। वहीं बिटिया के जिंदा होने की आस लगाये घरवाले का कलेजा फट गया। कुछ लोगों का इल्जाम है कि पंकज अब भी सच्चाई छुपा रहा है, उसने खुद रेश्मी का मर्डर कर उसे ठिकाने लगा दिया। वहीं केस को कमजोर करने के इरादे से वह झूठी कहानी गढ़ रहा है। चुटिया के थानेदार का कहना है कि हालांकि पंकज अबतक मर्डर करने की बात नहीं कबूल की है, वैसे इस बिंदु पर गहराई से तहकीकात की जा रही है।
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